कामर्शियल भवनों की साफ सफाई का बुरा हाल, नगरपालिका को सिर्फ किराये से मतलब
The cleanliness of commercial buildings is in a bad state, the municipality is only concerned about the rent
बस्ती, 14 दिसम्बर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छता अभियान स्थानीय प्रशासन भूल चुका है। निजी स्तर पर भी लोग लापरवाह हो चुके हैं। इस अभियान के तहत झाड़ू चलाकर लोग सांसद विधायक और यहां तक कि शासन के लोकप्रिय अफसर बन गये। लेकिन अभियान हाशिये पर चला गया। नगरपालिका क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। इस पोस्ट में आप जो फोटो देख रहे हैं वह कटरा पानी की टंकी पर स्थिति कामर्शियल काम्प्लेक्स के सीढ़ियों की है।
यहां प्रथम तल पर दर्जनभर से ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। आप सीढ़ियों से चढ़कर ऊर जायेंगे तो इस बात का अंदाजा लग जायेगा कि यहां के लोग और नगरपालिका स्वच्छता अभियान को लेकर कितने गंभीर हैं। यहां पान खाकर थूकने वाले कोई और नहीं दुकानों के मालिक और सीढ़िया ंचढ़कर जाने वाले ग्राहक ही हैं। यहां साफ सफाई की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। ऐसा लगता है वर्षों से यहां कोई सफाईकर्मी नही पहुंचा है। यही हाल कमोवेश अन्य कामर्शियल भवनों का है। स्थानीय प्रशासन को कामर्शियल भवनों की साफ सफाई और सुरक्षा के प्रबंध पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिये।














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