सेतु निगम की कार्यप्रणाली से नाराज हैं नोयडा
के मुख्य कार्यपालक अधिकारी
गौतमबुद्ध नगर, संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी उ.प्र. राज्य सेतु निगम की कार्यप्रणाली से ख़ासे नाराज़ हैं। उन्होंने जनहित में एक बार फिर सड़क निर्माण में हों रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कमर कस ली है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि यह भ्रष्टाचार उत्तर प्रदेश सरकार के अधीनस्थ एक सरकारी विभाग उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली एवं नोएडा को आपस में जोड़ने वाले 892 करोड़ की लागत से एक रोड का निर्माण किया जा रहा है, यह निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से कराया जा रहा है। निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी का आरोप है कि सेतु निगम की ओर से निर्माण कार्य में मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, न ही इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मिक्स डिजाइन ही आइआइटी या श्रीराम जैसी प्रयोगशाला से टेस्ट करा कर की जा रही है।
उन्होंने सेतु निगम महाप्रबंधक संदीप गुप्ता को स्पष्ट कहा है कि प्राधिकरण किसी भी प्रकार के निर्माण की गुणवत्ता पर समझौता नहीं करेगा। बताया जाता है कि इस पर कई बार सेतु निगम अधिकारियों को सुधार करने का नोटिस भी दिया गया लेकिन राज्य सेतु निगम कार्य प्रणाली में सुधार नही कर रहा है। इस पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह शासन सहित पीडब्ल्यूडी प्रमुख सचिव को लिखित पत्र के जरिये सेतु निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली से अवगत कराए। हालांकि सेतु निगम के महाप्रबंधक संदीप गुप्ता ने प्राधिकरण से सौ करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा था।
लेकिन नोएडा प्राधिकरण भुगतान करने के पक्ष में नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों प्राधिकरण सीईओ डा लोकेश एम ने सिविल विभाग के अधिकारियों के साथ चिल्ला एलिवेटेड रोड के निर्माण साइट का निरीक्षण किया था। इस दौरान जानकारी मिली कि मिक्स डिजाइन को सेतु निगम ने एनबीसीएल से पास कराया है। इस पर डाक्टर लोकेश एम ने कड़ा एतराज जताया। निर्माण सामग्री में रणतुंगा नामक कंपनी की सरिया का इस्तेमाल पाया गया। जबकि सेल व जिंदल की सरिया का ही इस्तेमाल होना चाहिए था। इसके अलावा जिस प्रकार से सरिया को साइट पर रखा गया था। उन जगहों पर सरिया जंग खा रही थी। पाइलिंग में जंग लगी सरिया का इस्तेमाल देखा गया। इससे पुल गिरने की संभावना जता नाराजगी प्रकट कर तत्काल प्रभाव से काम बंद करने को कहा गया।
लेकिन भ्रष्ट विभाग ने काम बंद नहीं किया उल्टा आश्वासन दिया गया कि जल्द ही इसमें बदलाव कर दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि दो दिन पहले ही एनएचएआइ की टीम के साथ सीईओ डा लोकेश एम ने चिल्ला एलिवेटेड रोड निर्माण साइट का निरीक्षण किया, क्योंकि आने वाले दिनों में यमुना पुस्ता के पास से जेवर में बनने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तक आने जाने के लिए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण कराना है। इस निर्माण को महामाया फ्लाईओवर के पास चिल्ला एलिवेटेड रोड से लिंक कराया जाएगा, लेकिन उन्हें फिर से चिल्ला एलिवेटेड रोड निर्माण में घटिया सामग्री को प्रयोग होते मिला, खामियों को देखकर मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉक्टर लोकेश एम भड़क गए हैं।
कहा जाता है कि पाइलिंग के ज्वाइंट की फोटो व वीडियो ग्राफी कराई गई थी, कंसलटेंट कंपनी ने मौके पर समीक्षा में पाया कि एलिवेटेड की पाइलिंग में जिस स्टील का प्रयोग कंपनी कर रही है। उस स्टील की गुणवत्ता खराब है। जबकि पाइलिंग के लिए प्राधिकरण ने किसी दूसरी स्टील के प्रयोग की बात की थी। इसे दूर करने का आश्वासन सेतु निगम अधिकारियों ने दिया था। इस पर सीईओ ने सेतु निगम के महाप्रबंधक संदीप गुप्ता को स्पष्ट कहा है कि यदि उन्होंने यदि अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव नहीं कराया तो किसी भी कीमत पर नोएडा प्राधिकरण से भुगतान नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में नोएडा प्राधिकरण की तरफ़ से कोई भी कार्य सेतु निगम को नहीं दिया जाएगा।












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