क्या जंतर मंतर के आन्दोलन ने
तैयार कर दी है सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि
अशोक श्रीवास्तव की संपादकीयः कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है। साल 2012 मे अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान मे लोकपाल की मांग को लेकर अनशन किया था। उद्देश्य था देश से भ्रष्टाचार समाप्त हो और एक जनप्रिय सरकार का गठन हो। इस आन्दोलन मे अरविन्द केजरीवाल, रामदेव, किरण बेदी सहित तमाम लोगों ने सक्रिय भागीदारी की। विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने की मांग उठी। निशाना कांग्रेस सरकार पर था, क्योंकि कांग्रेस सत्ता मे थी। सोशल मीडिया का दौर शुरू हो चुका था। इस आन्दोलन मे सोशल मीडिया को हथियार बनाकर कैंपेन चलाया गया।
समूचा भारत आन्दोलन के समर्थन मे उतर आया। कई दशक से सत्ता पर काबिज कांग्रेस सरकार की नींव हिलने लगी। सत्ता परिवर्तन की मंशा सबकी जुबान पर थी। सामने 2024 मे लोकसभा का चुनाव था। जनता ने कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंका। तब से आज तक कांग्रेस लगातार चुनाव हारती आ रही है। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, असम, केरल, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, गोवा और दिल्ली आदि राज्यों में कांग्रेस या तो अपने दम पर सरकार मे थी या गठबंधन की सरकार चला रही थी। जबकि इस समय केवल कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें हैं, जबकि झारखंड जैसे राज्यों में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है।
एक बार फिर देश मे भ्रष्टाचार चरम पर है। जनता मे त्राहि त्राहि मची है। सत्ता मे बने रहने के लिये संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, एथेनाल से गाड़ियों की उम्र और माइलेज कम हो रही है, भ्रष्टाचार, महंगाई आसमान पर पहुच चुकी है, कर्ज का बोझ, आय के अवसरों मे कमी, गरीब अमीर के बीच लगातार गहरी होती खाई, महिलाओं और बच्चियों संग दुष्कर्म, ताबड़तोड़ हत्यायें, अदालतों मे आर्गूमेन्ट की जगह सेटिंग, दम तोडती न्यायिक व्यवस्था, खरीद फ़रोख्त की राजनीति, बैंकों, पुलिस थानों, सरकारी दफ्तरों मे आम आदमी, खास आदमी के साथ भेदभाव, बेलगाम हो चुकी रिश्वतखोरी, देश की जनता मे समुदायों के आधार पर नफरत, आधुनिक महिलाओं द्वारा पुरूषों पर अत्याचार, ताबड़तोड़ हो रही आत्महत्याओं के बीच एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की आवाज बुलंद हो रही है।
2012 की तरह इस बार भी सामने विधानसभा फिर लोकसभा के चुनाव आसन्न हैं। जेन जी ने विरोध का तरीका बदल दिया है। अब जो भी प्रदर्शन हो रहे हैं उन पर जंतर मंतर के आन्दोलन का असर देखा जा रहा है। सवाल ये है क्या इस बार जनता भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेकेगी, जैसे 2014 मे कांग्रेस को बेदखल किया था। राजनीति के जानकार बता रहे हैं कि देश मे हालात अच्छे नही है। केन्द्र की मोदी सरकार राहुल गांधी और दो तीन नेताओं के रहमोकरम पर चल रही है। जिस दिन रहम कम हो या उसी दिन गिर जायेगी। राहुल गांधी खण्डित सरकार नही बनाना चाहते वरना खेला हो गया होता। अगर ये सच है तो सरकार को गिराने का सबसे माकूल वक्त कौन सा होगा। यह वक्त बतायेगा। लेकिन जिस प्रकार जेन जी और जेन अल्फा का आन्दोलन देखने को मिल रहा है, जनता अपने अधिकारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हो रही है इससे साफ कहा जा सकता है कि भाजपा के अच्छे दिख खत्म होने वाले हैं।
देश के कई राज्यों और जिलों में स्कूली बच्चों यानी ’जेन अल्फा’ ने बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं और स्कूलों की बदहाली को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया हैं। जेन-जी के आंदोलनों के बाद अब यह नई पीढ़ी अपनी छोटी उम्र में ही सिस्टम से अपने अधिकारों और सुविधाओं की मांग कर रही है। स्कूलों में पीने का साफ पानी, पंखे और बिजली की कमी, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर या अपर्याप्त हॉस्टल, स्कूल भवन, भोजन की खराब गुणवत्ता, स्कूलों का आपस में विलय किया जाना छोटी उम्र के बच्चों को आन्दोलित कर रहा है।
ऐसे मामले अभी तक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, हमीरपुर, फतेहपुर और अन्य जिलों से सामने आये हैं। जबकि मध्य प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, धार, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ में भी बच्चों ने स्कूल सुविधाओं और शिफ्टिंग के खिलाफ मोर्चा खोला है। बिहार और राजस्थान के भी कई जिलों से स्कूली बच्चों द्वारा प्रदर्शन किये जाने की खबरें सामने आई हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बच्चों का इस तरह मुखर होना सरकारों और प्रशासन के लिए एक नया और बड़ा संदेश बन गया है। चुनौतियां बढ़ती जा रही है।
दरअसल हिन्दू मुसलमान और मन्दिर मस्जिद के नाम नफरत फैलाने वाली सरकारों ने जनता को लूटने मे कोई कसर नही छोड़ा है। पिछले 10 बारह सालों में सिर्फ भाषणों से रामराज्य लाया जा रहा है। चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, जमीन घोटाले, एथेनाल, बेरोजगारी, महंगाई तथा आत्महत्या के बढ़ते मामलों मे जनता मे भारी गुस्सा भर दिया है। पेपर लीक मामले को लेकर जंतर मंतर पर हुये जेन जी के आन्दोलन ने सभी के भीतर से डर निकाल दिया। अब लोग अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। इतनी छोटी उम्र मे आन्दोलन कर रहे स्कूली बच्चों के जज्बे को सलाम है जो अपनी जरूरतें अफसरों के सामने निडर होकर रख पा रहे हैं।













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