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बस्ती में इस्तेमाल हो रहे हैं प्रशासनिक अधिकारी



बस्ती में इस्तेमाल हो रहे हैं प्रशासनिक अधिकारी
अशोक श्रीवास्तव की समीक्षाः बस्ती में बाल रोग विशेषज्ञ डा. एस.के. गौड़ का जे.के. हासिपटल सीएमओ के आदेश पर सील कर दिया गया। जब तक डाक्टर को क्लीन चिट नही मिल जाती है हास्पिटल की ओपीडी नही चलेगी, नये मरीज देखे और भर्ती नही किये जायेंगे और जो बच्चे पहले से एडमिट हैं उन्हे सरकारी हास्पिटल में शिफ्ट किया जायेगा। एक हफ्ते से जेके हास्पिटल चर्चा मे है। आपको बता दें जेके हास्पिटल डा. एसके गौड़ का है जो जनपद के जाने माने बाल रोग विशेषज्ञ हैं।


विगत दिनों इलाज के दौरान यहां एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। सोनहा थाना क्षेत्र के राधेश्याम कसौधन ने डाक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। फिलहाल हम ये नही जानते कि डाक्टर दोषी हैं या नहीं लेकिन इतना जरूर जानते हैं कि बस्ती में एक ऐसा गैगं काम कर रहा है जो किसी का भी हास्पिटल, स्कूल और पैथालोजी आदि जब चाहे बंद करा सकता है। स्थानीय प्रशासन भी इन्हे बेहद गंभीरता से ले रहा है। ये जब धरना प्रदर्शन पर आते हैं तो स्थानीय प्रशासन एक घण्टे के भीतर घुटनों पर आ जाता है। ये कितने असरदार हैं आप अंदाजा लगा सकते हैं।


हैरानी तब होती है जब हास्पिटल सील होने के बाद डाक्टर को बड़ी आसानी से क्लीन चिट मिल जाती है। जानकार बताते हैं बीडीए और स्वास्थ्य महकमे की सीलिंग और क्लीन चिट तक की कार्यवाही विटामिन एम पर टिकी होती है। फिलहाल संदर्भित मामले में पीड़ित राधेश्याम कसौधन ने डीएम को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी चिकित्सक के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग किया था। ज्ञापन देने के दौरान विश्व हिन्दू महासंघ के जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने राधेश्याम कसौधन का हौसला बढाते हुये कहा था कि संकट के समय में महासंघ उनके साथ है। 


दोषी चिकित्सक के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई न हुई तो महासंघ आन्दोलन को बाध्य होगा। इस बार तो आन्दोलन भी नही करना पड़ा। आपको बता दें डीएम को सौंपे ज्ञापन में डा. एस.के. गौड़ पर भू माफिया, आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने, चिकित्सा में लापरवाही बरतने आदि के गंभीर लगाये गये थे। डाक्टर ने क्या लापरवाही की, उन्होने किनकी जमीनों पर अवैध कब्जा किया है और किन नाजायज रास्तों से उनके पास अकूत दौलत आ रही है, ये सारी जानकारियां जांच के बाद जनता के सामने आनी चाहिये। वहीं अगर डाक्टर को क्लीनचिट मिलती है तो एक डाक्टर की छबि खराब करने वालों को भी जांच और कार्यवाही के दायरे में लिया जाना उचित व न्यायसंगत होगा। फिलहाल इस मामले पर हमारी नजर है आप भी पता करते रहिये आगे क्या होता है।

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