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सुसाइड या मर्डर, कब उठेगा अम्बरीश की मौत से रहस्य का परदा



सुसाइड या मर्डर, कब उठेगा अम्बरीश की मौत से रहस्य का परदा
यूपी डेस्क (निहारिका)।
शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी अंबरीश श्रीवास्तव (40) की मौत के बाद शहर मे गम और गुस्सा कायम है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव शाम चार बजे आवास पर लाया गया तो वहां मौजूद परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। प्रतिष्ठित कारोबारी अंबरीश श्रीवास्तव की मौत के बाद पहले सुसाइड और फिर पिस्टल साफ करने के दौरान गोली लगने की बात कही गई। 



हालांकि फॉरेंसिक टीम और पुलिस टीम कई उलझे सवालों को जवाब तलाशने में जुटी है। घटना के दौरान की परिस्थितियां कई तरह के सवाल उठा रही हैं। लंबे समय से पिस्टल रखते आ रहे अंबरीश क्या मैगजीन से बिना बुलेट निकाले पिस्टल साफ कर रहे थे और घटना के बाद दरवाजा भी खुला मिला। ये दोनों सवाल जांच टीम को परेशान कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अंबरीश कुसम्ही वाले फार्म हाउस पर हफ्ते या 10 दिन में कभी एक या आधे घंटे के लिए जाते थे। शुक्रवार को सुबह लगभग नौ बजे के करीब वह फार्म हाउस पहुंचे और सीधे ऊपर की मंजिल पर चले गए। 


पंद्रह-बीस मिनट बाद तक जब कोई छत पर नहीं गया तो फार्म हाउस के मैनेजर ने ही वहां के कर्मचारियों को फोन करके डांटा कि, मालिक आए हुए हैं और किसी ने पानी तक नहीं पूछा? इसी के बाद एक कर्मचारी छत पर पानी लेकर पहुंचा, तब तक अंबरीश की मौत हो चुकी थी। कर्मचारी की सूचना पर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि अंबरीश के मुंह में गोली लगी हुई थी और पिस्टल दाएं हाथ की तरफ गिरी हुई थी। जांच में पता चला कि, अंबरीश दाहिने हाथ से ही अपना सारा काम करते थे। 


मत रो मां, मैं संभालूंगा पूरा परिवार, पापा से बहुत कुछ सीखा है३रोती मां का हाथ पकड़कर जब मासूम बेटे ईशान ने यह बात बोली तो, यह सुनकर हर कोई रो पड़ा। मासूम को पकड़कर उसके दादा लिपट गए। अम्बरीश की दीपाली से साल 2012 जून में शादी हुई थी। जबकि 11 जून को अम्बरीश का जन्मदिन भी पड़ता था। पत्नी ने बताया कि जन्मदिन और शादी की सालगिरह साथ में सेलिब्रेट करते थे। जब शव अंतिम संस्कार के लिए राजघाट ले जाया जा रहा था, उस समय अंतिम दर्शन के दौरान एक और बेहद भावुक क्षण सामने आया। 


अम्बरीश की पत्नी दीपाली, अपनी ननद पारूल श्रीवास्तव (जो अहमदाबाद से आई थीं) से लिपटकर रोते हुए बार-बार यही कहती रहीं कि अब उनका और बच्चों का क्या होगा। इसी बीच उनका बड़ा बेटा ईशान अपनी मां का हाथ पकड़कर बोला, “मां रोओ मत, मैं हूं ना। मैं पूरे परिवार को संभालूंगा।” आंखों में आंसू लिए बेटे के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। वहीं छोटा बेटा अपने चाचा से लिपटकर बार-बार पूछता रहा, “पापा को क्या हुआ? उन्हें उठाइए न चाचा।” यह सुनकर वहां मौजूद लोगों का दिल दहल उठा।


अम्बरीश की मौत की सूचना के बाद पार्क रोड स्थित आवास पर सुबह से ही लोगों का भीड़ लगना शुरू हो गया। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि, छात्रनेता और परिचितों के साथ सैकड़ों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचने लगे। पोस्टमार्टम के दौरान एम्स परिसर में भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दोपहर बाद करीब चार बजे जैसे ही उनका शव आवास पर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद लोगों की भीड़ और बढ़ गई। अम्बरीश की शहर में एक अलग पहचान थी। सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर बड़े आयोजनों तक उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी, यही वजह रही कि उनके निधन की खबर सुनते ही हर वर्ग के लोग उनके घर पहुंच गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और व्यवस्था बनी रहे।

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