NBFC की मनमानी, रिजर्ब बैंक से शिकायत
गौतमबुद्ध नगर संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। एन बी एफ सी ( नान बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) के मनमानी से त्रस्त एक व्यक्ति ने भारतीय रिजर्व बैंक से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने लोगों को तथा कथित बैंक से सतर्क रहने की सलाह दी है। इस संबंध में नोएडा के एक कारोबारी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वह इस बैंक की ठगी का शिकार हो चुका है।
कारोबारी ने (नाम प्रकाशित नहीं किए जाने की शर्त पर) बताया कि कुछ साल पहले उसने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए एक निजी बैंक से लोन लेने का फैसला किया। एक एजेंट ने उनसे संपर्क करके निजी बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों से मिलवाया। उन कर्मचारियों ने प्रोपर्टी को गिरवी रखकर फटाफट लोन दिलवाने के लिए अच्छे सपने दिखाए। नोएडा के कारोबारी ने सभी जरूरी दस्तावेज बैंक वाले कर्मचारियों को दे दिए। बैंक वालों ने फटाफट 1 करोड़ 32 लाख रूपए का लोन स्वीकृत कर दिया।
इस लोन के लिए 31 अक्टूबर 2023 को स्वीकृति पत्र जारी कर दिया। कारोबारी का कहना है कि बैंक का यह लोन बड़ी ठगी का कारण बन गया है। बताया जाता है कि नोएडा के कारोबारी को बैंक ने लोन नम्बर ।च्च्स्-00042943 के द्वारा जो ैंदबजपवद स्मजजमत जारी किया उसे पढक़र कारोबारी भौचक्का रह गए। लेटर में लोन का इंटरेस्ट रेट 15 प्रतिशत लिखा गया था। जबकि उन्हें 8 या 9 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट की बात बताई गई थी। विरोध करने पर बैंक ने कहना शुरू कर दिया कि हमारे बैंक में तो 13 से लेकर 22 प्रतिशत तक का इंटरेस्ट लगता है।
जब कारोबारी ने लोन रद्द करने को कहा तो बताया गया कि लोन स्वीकृत होने के बाद रद्द नहीं हो सकता तथा आपकी प्रोपर्टी के कागजात भी आपको नहीं मिल सकते। मरता क्या ना करता कारोबारी को लोन लेना ही पड़ा। बात मोटे इंटरेस्ट रेट तक ही नहीं रूकी बैंक ने लोन देने के बदले मोटी प्रोसेसिंग फीस भी वसूल कर ली। कारोबारी ने बताया कि 1 करोड़ 32 लाख के लोन के लिए दो लाख 35 हजार रूपए प्रोपेसिंग फीस के नाम पर वसूल लिए गए। साथ ही इंश्योरेंस के नाम पर 5 लाख रूपए अलग से वसूल लिए गए।
इस प्रकार लोन में से साढ़े सात लाख रूपए बैंक ने पहले ही काट लिए। जब कारोबारी ने आपत्ति की तो उसे बताया गया कि अब एक साल तक आप कुछ नहीं कर सकते। एक साल बाद आप इस लोन के पैसे को जमा करके बैंक से अलग हो सकते हैं। भुक्तभोगी कारोबारी ने आगे बताया कि उसने पूरे एक साल तक बैंक को सवा तीन लाख रूपए महीना की किश्त का भुगतान किया। पूरे 12 महीने तक किश्तों के रूप में 39 लाख रूपए का भुगतान करने के बाद भी लोन की रकम उतनी की उतनी ही रही। एक साल पूरा होते ही नोएडा के कारोबारी ने बैंक को ई-मेल भेजकर लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का आग्रह किया।
दूसरे बैंक ने बेहद कम ब्याज दर पर लोन देने का आश्वासन दे दिया था। ई-मेल मिलते ही बैंक के अधिकारी कारोबारी के कार्यालय में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि लोन दूसरे बैंक में ले जाने पर आपको फोर क्लोजर चार्ज के रूप में 20 लाख रूपए देने पड़ेंगे। जब कारोबारी ने मना किया तो बैंक वालों ने कहा कि हम आपका इंटरेस्ट रेट कम कर देते हैं। आप हमारे बैंक के साथ ही जुड़े रहो। तब निजी बैंक वालों ने इंटरेस्ट घटाकर 13.75 प्रतिशत कर दिया। कारोबारी को मजबूरन इसी रेट पर लोन चलाना पड़ा। फिर पूरे एक साल तक किश्तें देने पर भी लोन एमाउंट उतना का उतना ही बना रहा।
भुक्तभोगी के अनुसार दो साल पूरे होने पर जब कारोबारी ने बैंक बदलने की जिद्द ठान ली तो फोर क्लोजर के नाम पर बैंक वालों ने उस कारोबारी से 15 लाख रूपए जबरन वसूल कर लिए। कारोबारी ने इस बात की शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक में दर्ज करा दी है। नोएडा के इस कारोबारी को अब इस ठगी के मामले में त्ठप् से न्याय मिलने की उम्मीद है। वैसे उल्लेखनीय है कि नोएडा में रियल इस्टेट कारोबार में जमीन तथा फ्लैटो की बड़े पैमाने पर खरीद बिक्री होती है। जहां सरकारी बैंक होम लोन देने से साफ साफ मना कर देते हैं वहां पर ये एन बी एफ सी वाले धड़ल्ले से मनमाने ब्याज दर पर लोन देने का काम करते हैं। ऐसे एन बी एफ सी वाले बिल्डरों से साठ गांठ कर झूठे सपने भी लोगों को दिखाते हैं तथा वसूली करने हेतु गुंडागर्दी भी करते हैं। वाकई रिजर्व बैंक आफ इंडिया और शासन प्रशासन को ऐसे एन बी एफ सी वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।












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