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देवरिया में छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में हुई मुठभेड़ की जांच करेगा मानवाधिकार आयोग

देवरिया में छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में हुई मुठभेड़ की जांच करेगा मानवाधिकार आयोग Human Rights Commission will investigate the encounter in Deoria in case of molestation of girl students.




देवरिया 24 अक्टूबर (सुरेन्द्र कुमार सिंघल)। राज्य मानवाधिकार आयोग जिले के तरकुलवा थाना अन्तर्गत हुई कथित मुठभेड़ में पुलिस की भूमिका की जांच करेगा। राज्य मानवाधिकार आयोग ने छात्राओं से छेड़खानी के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में आयोग ने 12 दिसंबर तक पुलिस अधीक्षक देवरिया से जांच रिपोर्ट मांगी है। 


प्रकरण में परिस्थितियों को देखते हुए एक अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने शिकायत दर्ज करायी थी, जिसे संज्ञान लेते हुए आयोग ने जांच के आदेश दिए हैं। इस सन्दर्भ में आरोपियों में से एक की बहन ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए योगी सरकार से न्याय की गुहार लगाई थी। उल्लेखनीय है कि बाइक सवार चार युवकों ने बीते 4 अक्तूबर को तरकुलवा क्षेत्र में स्कूल से घर लौट रही दो छात्राओ से छेड़छाड़ की थी। इस मामले के दो आरोपियों रितिक पुत्र दीनानाथ एवं धीरज पटेल पुत्र राधाकृष्ण पटेल निवासी बैकुण्ठपुर, बंजरिया टोला थाना तरकुलवा को छह अक्तूबर की रात करीब 11.30 बजे पुलिस ने तरकुलवा थाना अंतर्गत ग्राम गोठां रसूलपुर के पास कथित तौर पर पैर में गोली मार कर गिरफ्तार कर लिया था।



इस मामले में अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मुठभेड़ को संदिग्ध बताते हुए आठ अक्तूबर को आयोग में शिकायत की थी। उनका आरोप है कि जिस तरह का घटनाक्रम पुलिस द्वारा बताया जा रहा है वह फिल्मी प्रतीत होता है। अधिवक्ता का कथन है कि भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों में जिस अपराध के लिए अधिकतम दंड एक वर्ष है उस मामले में आरोपी की टांग में गोली मारकर उसे जीवन भर के लिए लंगड़ा कर दिया जाना और बिना किसी न्यायिक कार्यवाही के पुलिस द्वारा सीधे गोली मारने का दंड देना मानवाधिकार का हनन तो है ही, साथ ही पुलिस द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग भी है। विद्वान अधिवक्ता ने मांग की है कि मुठभेड़ के दौरान आरोपियों के पास जो हथियार पाए गए हैं उनके साथ ही पुलिस ने जिन हथियारों से आरोपियों को गोली मारने का दावा किया है उन्हें भी जमा कराया जाना न्याय हित में आवश्यक है। 


अधिवक्ता की यह भी मांग है कि इस बात की भी जांच की जाए कि आरोपी देवरिया में कब से रह रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि वह बाहर रहकर नौकरी करते हैं। ऐसे में छेड़खानी की किसी गैंग का आदतन सदस्य होने की संभावनाएं बहुत कम है। इस बात की भी जांच आवश्यक है कि मुठभेड़ असली है या फर्जी। आयोग ने 22 अक्तूबर को देवरिया के पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच का आदेश देते हुए आगामी 12 दिसंबर तक रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में देवरिया के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा से गुरूवार की शाम को करीब आठ बजे बात करने का प्रयास किया गया। लेकिन सदैव की भांति उनका मोबाइल उनके पी आर ओ ने उठाया और कहा कि साहब व्यस्त हैं। इसलिए इस संबंध में पुलिस अधीक्षक का वक्तव्य नहीं लिया जा सका। लेकिन माना जा रहा है कि मानवाधिकार आयोग के द्वारा जांच किए जाने की जानकारी पुलिस को हों गई और पुलिस हर स्तर पर अपने बचाव में लग गई है।

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