संसद में प्रियंका गांधी ने हर मुद्दे को सलीके से छुआ, निशाने पर रही भाजपा और पीएम मोदी
Priyanka Gandhi touched upon every issue in Parliament in a very polite manner, targeting BJP and PM Modi
नेशनल डेस्कः कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार को संसद में पहली बार बोलीं। सभी की नजर प्रियंका गांधी पर थी। उन्होने संभल, बहराइच, उन्नाव, हाथरस से लेकर मणिपुर तक कोई मुद्दा नहीं छोड़ा जिस पर अपनी बात सलीके से न रखा हो। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को आड़े हाथों लेती रहीं। कहा कि शायद प्रधानमंत्री यह समझ नहीं पाए हैं कि संविधान ‘संघ का विधान’ नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक ‘‘कायरों के हाथ में कभी नहीं रहा और यह देश उठेगा और लड़ेगा’’ सत्य की मां्र करेगा। प्रियंका गांधी ने लोकसभा में ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा में भाग लेते हुए सरकार पर भय फैलाने का आरोप लगाया और दावा किया कि यदि लोकसभा चुनाव के नतीजे इस तरह के नहीं होते तो यह सरकार संविधान बदलने का काम करती। वायनाड से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद सदन में उनका यह पहला भाषण था। उन्होंने कहा, ‘‘‘संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वादा है। यह वादा एक सुरक्षा कवच है, जिसे तोड़ने का काम शुरू हो चुका है।’’
प्रियंका गांधी ने दावा किया, ‘‘यह सरकार ‘लेटरल एंट्री’ और निजीकरण के जरिए आरक्षण को कमजोर करने का काम कर रही है। इस चुनाव में हारते-हारते जीतने के बाद उन्हें पता चल गया कि देश की जनता ही संविधान को सुरक्षित रखेगी और संविधान बदलने की बात इस देश में नहीं चलेगी।’’ प्रियंका गांधी का कहना था कि आज जातिगत जनगणना का जिक्र सत्तापक्ष कर रहा है क्योंकि इस तरह के नतीजे आए। ‘‘आज जनता की मांग है कि जातिगत जनगणना हो।
जातिगत जनगणना इसलिए भी जरूरी है, ताकि पता चले कि देश में किसकी क्या स्थिति है और नीतियां उस हिसाब से बनें।’’उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लोकसभा चुनाव के समय दिए कुछ भाषणों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी की जातिगत जनगणना के लिए गंभीरता का प्रमाण देखिए। जब चुनाव में पूरा विपक्ष जातिगत जनगणना की बात कर रहा था, तब नरेन्द्र मोदी कह रहे थे- ये आपकी भैंस और मंगलसूत्र चुरा लेंगे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक न्याय का कवच तोड़ रही है। आज किसान भगवान भरोसे है। उन्होंने दावा किया कि भारत लंबे समय तक ‘‘कायरों के हाथ में कभी नहीं रहा और यह देश उठेगा और लड़ेगा’’।













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