हलके में न लें जानवर के काटने की घटना Do not take animal bite incidents lightly
विश्व रेबीज दिवस पर विशेषः बस्ती जिला अस्पताल के आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने मीडिया दस्तक से वार्ता के दौरान बताया कि रेबीज वायरस के संक्रमण से होने वाली घातक बीमारी है जो मनुष्यों एवं जानवरों में हो सकती है। लेकिन इससे बचाव पूरी तरह संभव है। यह बीमारी ज्यादातर कुत्तों (96 प्रतिशत) के काटने या खरोचने के कारण होती है लेकिन बिल्ली, बंदर या अन्य जंगली जानवरों के द्वारा भी हो सकती है। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
कैसे होता है संक्रमण :
यदि कोई भी जानवर आपको काट लेता है तो रेबीज हो सकता है। सामान्यतः पालतू जानवर ऐसा नहीं करते जब तक कि वह संक्रमित ना हो।
क्या करेंः
जानवर के काटने के बाद सबसे पहले घाव को साबुन और साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोएं। घाव को खुला छोड़े, टांके या बैंडेज ना लगाएं।
जरूरी है त्वरित उपचार
नजदीकी चिकित्सक से मिलें और बचाव हेतु त्वचा या मांसपेशियों में टीके अवश्य लगवाएं। सामान्यतः मांसपेशियों में लगने वाले पांच टीके अथवा त्वचा के नीचे लगने वाले चार टीके चलन में है। घाव का उपचार चिकित्सक द्वारा जांच कर श्रेणी के आधार में किया जाता है।
कैटेगरी 01
प्रथम श्रेणी में जिसमें केवल त्वचा में जानवर का लार, या छूने या प्यार करना आता है, में किसी भी प्रकार के टीके की आवश्यकता नहीं होती।
कैटेगरी 02
द्वितीय श्रेणी में त्वचा में दांत या नाखून से आए हुए खरोच या लालिमा जिसमें हल्का सा रक्त का स्राव हो आता है, जिसके उपचार हेतु त्वचा में कुल 4 टीके उपचार के प्रथम दिवस अर्थात दिवस 0, 3, 7 और 28वें दिन लगवाए जाते हैं। इसी प्रकार यदि मांसपेशियों में लगने वाले टीके का चयन किया जाता है तो दिवस शून्य 0, 3, 7, 14 और 28 दिन तक पांच टीके लगाए जाते हैं।
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तृतीय श्रेणी के घाव में श्रेणी 2 की तरह टीके के साथ-साथ एंटीबॉडी के रूप में इम्यूनोग्लोबुलीन घाव के चारों तरफ मरीज के वजन के आधार पर निर्धारित करके लगाया जाता है।
क्यों है खतरनाक
इस तरह समय पर टीका लगाकर आप रेबीज जैसे जानलेवा बीमारी से खुद को बचा सकते हैं क्योंकि यदि आपने टीका नहीं लगाया और यदि आपके शरीर में संक्रमण पहुंच गया तो 30 दिन से लेकर 6 साल के अंदर कभी भी आपको रेबीज के लक्षण जैसे पानी, लाइट, हवा से डर, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण आ सकते हैं जो ला इलाज है।
कैसे बचाव करें
ज्यादातर देखा गया है की आवारा कुत्ते छोटे बच्चों पर ज्यादा हमला करते हैं। समय-समय पर अपने पालतू जानवरों को नियमित एंटी रेबीज का टीका लगवाते रहे और हमेशा अपनी निगरानी में रखें। पालतू जानवर को किसी भी अज्ञात, आवारा जानवर के काटने की घटना होती है तो उसे तुरंत पशु चिकित्सालय लेकर जाएं और टीका लगवाएं। अपने घर के आसपास कूड़ा कचरा या बचे हुए खाना ना फेक क्योंकि उसी के लालच में आवारा जानवर आपके घर और आपके परिवार के नजदीक आते रहेंगे। पंचायत या नगर पालिका के सहयोग से आवारा कुत्तों को रेबीज से बचाव के टीके लगवाने चाहिए।
यह बहुत जरूरी :
किसी भी अज्ञात आवारा जानवर को बेवजह छूने या पकड़ने की कोशिश ना करें रेबीज के संक्रमण से जानवरों में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं।
जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन हो जाना। भौंकने की आवाज में बदलाव। बिना किसी कारण के उत्तेजित होना और काटना। पानी से डरना। मुंह से अत्यधिक लार का निकलना। झटके आना और 10 से 15 दिनों के अंदर मृत्यु हो जाना।
टीका है आसान और सुरक्षित
यदि आपने पहले से एंटी रेबीज टीका लगवा चुके हैं और आपको जानवर फिर से काट दे तो आपको केवल प्रथम और तीसरे दिवस के टीके (0.5 उस मांशपेशियों में या 0.1 उस त्वचा में) ही लगाने की आवश्यकता होगी, लेकिन इसके लिये आपको पूर्व में लगे टीके का रिकॉर्ड, स्लिप या डॉक्टर की पर्ची सम्भाल के रखना जरूरी है।
जानवर हमारे पर्यावरण के अभिन्न अंग है हमें कोशिश करनी चाहिए कि उन्हें छेड़े ना, ना ही उन्हें परेशान करें। पहले से ज्यादा प्रभावी टीके दशकों पहले कुत्तों के काटने पर 14 टीके लगते थे, जिसके डर से मरीज जड़ी बूटी या झाड़फूंक का सहारा लेकर जान गवां देते थे। अनुसंधान अनुसार यह पाया गया है कि पहले की मांशपेशियों में लगने वाले 5 डोज वाले टीके की अपेक्षा त्वचा में लगने वाले 4 डोस के टीके ज्यादा प्रभावी ढंग से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। आने वाले समय में केवल 3 अथवा 4 टीके ही लग सकते है। हिमाचल प्रदेश में इस पर अनुसंधान जारी है।
निःशुल्क है टीके
सभी टीके समस्त शासकीय चिकित्सालयों में पूर्णतः निःशुल्क है और गंभीर बीमारी के रोगी, छोटे बच्चे या गर्भवती महिला सभी के लिए पूर्णतः सुरक्षित भी है। विश्व रेबीज दिवस विशेष 28 सितंबर पर जनहित में साझा। फोटो परिचयः डा. वी.के. वर्मा













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