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अशोक श्रीवास्तव की समीक्षाः उन्नाव रेपकांड, ये कैसा फैसला, कैसे करें न्याय पर भरोसा



अशोक श्रीवास्तव की समीक्षाः उन्नाव रेपकांड,
ये कैसा फैसला, कैसे करें न्याय पर भरोसा

नेशनल डेस्कः
उन्नाव रेपकांड में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जमानत दे दी। इस फैसले का विरोध हो रहा है। कुलदीप सेंगर आरोपी नही बल्कि दोषी हैं और 2019 से जेल मे सजा काट रहे हैं। ऐसे किसी अपराधी को 6 साल मे जमानत मिल जायेगी तो न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। 



कोर्ट का फैसला आने के बाद रेप पीड़िता और उसकी मां इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गईं, लेकिन पुलिस उन्हे वहां से घसीटते हुए हटा दिया। अब उस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर सवाल खड़े किया हैं। उन्होंने लिखा है कि “ये अब कड़वी सच्चाई बन चुकी है कि भाजपा के राज में इंसाफ उल्टा चलता है। रेप पीड़ितों और उनके परिवारों को लाठियां, डर और प्रताड़ना मिलती है और रेप के आरोपियों को संरक्षण और सम्मान मिलता है। ये सिर्फ सिस्टम की नाकामी नहीं बल्कि सत्ता की मानसिकता का आईना है।“ 


हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई है और उस प्रकरण में उन्हें जमानत नहीं मिली है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की तीन जमानतें जमा कराने की शर्त पर बलात्कार मामले में उन्हें जमानत देने का आदेश दिया।


रेप पीड़िता और उसके मां के साथ धरने पर बैठी महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि “वाह रे देश का कानून यही देश का न्याय है. कैसे बचाएंगे देश की बच्चियों को कैसे मिलेगा न्याय! ये बच्ची उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता है दरिंदगी के बाद पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई कार एक्सीडेंट में बुआ और वकील की मौत हो गई। 100 से ज़्यादा टाके पड़े, कई हड्डियां टूटी वेंटीलेटर पर रही 6 महीने के इलाज के बाद जान मुश्किल से जान बची और अब. यह कैसा न्याय है ?


योगिता भयाना कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। इस दौरान पीड़िता ने कहा कि वे सिर्फ उनसे मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा करना चाहती हैं और यह बताना चाहती हैं कि वे किन हालात से गुजर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रपति से भी मिलकर अपनी बात रखना चाहती हैं और उन्हें न्याय चाहिए।  आपको बता दें कि कुलदीप सिंह सेंगर का मामला यूपी के उन्नाव जिले का है। साल 2017 में वह भाजपा से विधायक थे। तभी उन पर एक नाबालिग लड़की का रेप करने का आरोप लगा था। 


पीड़िता ने बताया कि नौकरी देने के बहाने से उन्होंने आवास पर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले ने उस वक्त तूल पकड़ा जब पीड़िता ने न्याय न मिलने पर सीएम हाउस के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत और फिर पीड़िता की कार का भयानक एक्सीडेंट होने से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। मामला इतना पेचीदा हो गया कि इसमें देश की सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले को दिल्ली ट्रांसफर किया गया। साल 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुना दी और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। 


इसके बाद पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उम्र कैद की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवादा खटखटाया। अब दिल्ली उच्च अदालत ने सेंगर की अपील लंबित रहने तक उसकी सजा पर रोक लगा दी है। आपको निर्भया कांड याद होगा। बाद पूरा देश सड़कों पर था। हाथरस भी आप भूले नही होंगे जिस मामले मे यूपी पुलिस ने पीड़िता की लाश को पजिनों को दिखाये बगैर पेट्रोल से जलाकर जुल्म की इन्तेहां कर दी थी। हैदराबाद मे महिला डाक्टर के साथ हैवानियत की घटना भी याद होगी जिसमे दरिंदों ने रेप के बाद डाक्टर को पेट्रोल से जिंदा जला दिया था। 


उन्नाव की पीड़िता न्याय मांगने निकली तो उसकी आवाज दबाने की भरपूर कोशिश हुई। नाबालिग से रेप, परिवार की मौतें, खुद पीड़िता की जिंदगी दांव पर और अंत में आरोपी को जमानत। न सरकार भरोसेमंद रही और न न्याय पालिका। अब भगवान से मनाइये किसी के साथ ऐसी घटना न हो और हो तो इसका फैसला स्वयं भगवान करे। क्योंकि ऐसे फैसले न्याय पर भरोसा नहीं, डर पैदा करते हैं। जब सत्ता आरोपी के साथ खड़ी हो और पीड़िता के लिये कानून-व्यवस्था ही खतरा बताया जाए, तो “बेटी बचाओ” सिर्फ नारा रह जाता है इसके अलावा कुछ नहीं।

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