जनान्दोलन के आगे बैकफुट पर आई धामी सरकार,
अंकिता हत्याकांड की होगी सीबीआई जांच
उत्तराखंड डेस्कः उर्मिला सनावर द्वारा आडियो वीडियो जारी किये जाने के बाद पिछले कई दिनों से अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उत्तराखण्ड की जनता सड़कों पर है। देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 को हुये निर्भया कांड के बाद यह दूसरा मौका था जब अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिये लाखों की संख्या मे लोग सड़कों पर उतरे। महिलाओं ने इसमे बढ़चढ कर हिस्सा लिया।
जन भावनाओं के आगे पुष्कर धामी सरकार को घुटने पर आना पड़ा और सरकार की ओर से मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई। आन्दोलनकारी इसे प्रदेश की जनता और तमाम सामाजिक संगठनों की जीत बता रहे हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित कराना रहा है और आगे भी रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआइ जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है।
उन्होने कहा सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या सबूतों की अनदेखी नहीं की जाएगी। अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी। धामी ने राज्य सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का विवरण भी साझा किया। उन्होने कहा घटना के तुरंत बाद महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल एसआईटी बनाई गई थी। सरकार की प्रभावी पैरवी के कारण ट्रायल के दौरान किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल सकी। सुनवाई पूरी होने के बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आपको बता दें अंकिता भंडारी ने 28 अगस्त 2022 को एक ऑनलाइन विज्ञापन देखने के बाद वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की थी। कुछ ही समय बाद अंकिता रिजॉर्ट में चल रही रहे गैरकानूनी गतिविधियों को समझ गई। इसके बाद उसने दूसरी नौकरी की तलाश शुरू कर दी है। बताया जाता है कि इसी बीच रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना को लेकर हंगामा हुआ तो पुलिस ने तीन आरोपियों को 23 सितंबर 2022 को गिरफ्तार कर लिया।
उर्मिला सनावर द्वारा जारी आडियो वीडियो मे एक वीआईपी का नाम सामने आया जिसे स्पेशल सर्विस देने का अंकिता भंडारी पर दबाव बनाया गया था, इनकार करने पर उसकी हत्या कर दी गयी। तीन साल बाद फिर ये मामला जोर पकड़ लिया और उत्तराखण्ड की जनता वीआईपी का नाम उजागर करने के लिये सीबीआई जांच की मांग करने लगी। एक बड़ा आन्दोलन खड़ा हुआ और धामी सरकार को इसके आगे झुकना पड़ा। आरोप सही पाये गये तो उत्तराखण्ड की राजनीति मे एक ऐसा भूचाल आयेगा जिसका असर दूसरे प्रदेशों पर भी पड़ेगा और भाजपा को भारी क्षति उठानी पड़ सकती है।













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