Type Here to Get Search Results !

Bottom Ad

सर्फ एक्सेल से भी नही छूटेंगे बस्ती पुलिस पर लगे दाग



सर्फ एक्सेल से भी नही छूटेंगे बस्ती पुलिस पर लगे दाग
Even Surf Excel will not remove the stain on Basti Police.
अशोक श्रीवास्तव की समीक्षाः बस्ती पुलिस पर अनेकों दाग हैं। कई तो ऐसे हैं जो सर्फ एक्सेल से भी नही छूटने वाले हैं। आज हम दिल दहला देने वाली कुछ घटनाओं की याद ताजा करायेंगे जिसका अनावरण आज तक नही हुआ। पीड़ित परिवार सिर पटकता रहा लेकिन उन्हे इंसाफ नही मिला। पुलिस इन सभी मामलों को ठंडे बस्ते के हवाले कर चुकी है।


पहले ताजा घटना की बात कर लें। जिले के परशुरामपुर थाने से 05 फरवरी को लापता हुये दरोगा अजय गौड़ की लाश सरयू नदी के माझा इलाके से 08 फरवरी को बरामद हुई थी। 9 दिन बाद भी पुलिस इस हाईप्रोफाइल मामले का खुलासा नही कर पाई। घटना को लेकर कयासबाजी का दौर जारी है वहीं नये पुलिस कप्तान के लिये इस घटना का सफल अनावरण किसी अग्निपरीक्षा से कम नही है। दरोगा अजय गौड़ के भाई झांसी के एडीएम अरूण कुमार और दरोगा की पत्नी पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट नही हैं।


दबी जुबान से लोग यह भी कह रहे हैं कि दरोगा हत्याकांड मे कहीं महकमे का ही कोई व्यक्ति तो नहीं शामिल है। ऐसा इसलिये कि वारदात को अंजाम देने वाला कोई सामान्य अपराधी नही है और अपराधी से ज्यादा तेज दिमाग पुलिस का ही होता है। कहा जा रहा है कि किसी तेज दिमाग ने वारदात को ऐसे अंजाम दिया है कि पुलिस को अब त मिली छिटपुट जानकारियों से कड़िया जोड़ने मे पसीना उतर रहा है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि मीडिया की जरूरत से ज्यादा सक्रियता के चलते पुलिस अपराधी तक नही पहुंच पा रही है।


पुलिस भी इस बात को अच्छी तरह जानती है कि वारदात का अंजाम देने वाले पुलिस की एक्टिविटी पर पैनी नजर रखते हैं और मीडिया के चलते पुलिस की कोई कार्यवाही गोपनीय नही रह पा रही है। जाहिर है पुलिस जितनी सक्रियता से अपराधी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है उससे ज्यादा सक्रियता से अपराधी स्वयं का बचाव करने मे जुटा होगा। पुलिस की हर एक्टिविटी अखबारों में छप रही है इससे अपराधी को अपना बचाव करने मे मददगार साबित हो रही है। फिलहाल पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर नही पहुंची है।


हर कोई चाहता है कि घटना का खुलासा हो और अपराधी सामने आये। वकील और पुलिस की हत्या करने का दुस्साहस कोई नही कर पाता। वारदात को अंजाम देने वाले की बड़ी आर्थिक या पारिवारिक क्षति हुई होगी, तब किसी ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया होगा। पुलिस को अपनी जांच का दायरा बढ़ाना होगा। वरना कहीं ऐसा न हो कि पूर्व के कई अनसुलझे वारदातों की लिस्ट मे दरोगा हत्याकांड भी शामिल हो जाये और पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी समय रहते दूसरी घटनाओं की तरह इसे भी धीरे धीरे भूल जायें और ठंडे बस्ते मे डाल दें।


दूसरी घटना पिछले साल 18 मई को लालगंज थाना क्षेत्र के सिद्धनाथ गांव में घटी। रेप व मर्डर की घटना ने दिल दहला दिया था। इस जघन्यतम घटना से जनपदवासियों का गुस्सा आसमान पर था। पुलिस की कई टीमे खाक छानती रहीं, भरोसा पर भरोसा दिलाया गया लेकिन घटना का अनावरण नही हुआ। पांच वर्षीय मासूम के साथ दरिंदगी की हद की गई थी। सूत्र बताते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ’बोथ साइड रेप’ के बाद उसकी हत्या कर दी गई। उसको मारने के लिए पैर पकड़कर सिर के बल पटका गया।


दोनों हाथ की हड्डियां तोड़ दी गई थी। एक पैर की भी हड्डी टूट गई थी। सिर में गंभीर चोट आई थी। पेट पर कई घूंसे मारे गए थे। सीने की हड्डी टूटी थी। गला भी दबाया गया था। बाद में गला भी काटा गया था। हैवान ने उसकी अंतिम सांस रोकने तक के लिए हर संभव प्रयास किया। रेप व मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए एसपी अभिनंदन ने पांच पुलिस टीमों को लगाया था, सभी खाली हाथ थे। मासूम अपनी दादी को घर से खोजने निकली थी और फिर वापस नही लौटी। ये घटना मा बाप को जीवन भर का दर्द दे गयी और खाकी पर कभी न मिटने वाला दाग।


किसी वीआईपी के परिवार के साथ यह घटना होती तो पूरा अमला लग जाता घटना के अनावरण मे। बार बार सीबीआई जांच की मांग उठती रही लेकिन सीबीआई शायद ऐसे मामलों के लिये नही है। गरीब लाचार लोगों की आवाज कैसे दबा दी जाती है, सिद्धनाथ की घटना से समझा जा सकता है। परिजन उस मनहूस रविवार को आज भी कोस रहे हैं, जब कपड़ा बेचने के लिए एक फेरी वाला गांव में आया था। गांव की हरिजन बस्ती में दोपहर करीब दो बजे एक फेरी वाला कपड़ा बेचने के लिए आया था। घर से सामने जब वह गुजरा तो बेटी दौड़ कर अपनी मां के पास गई। नया कपड़ा खरीदने की जिद की।


मां ने कपड़ा खरीदा। पैसे देने की बात आई तो बच्ची को याद आया कि उसके एक रिश्तेदार ने उसे दो सौ रुपये दिए थे। उसने वह पैसा अपनी दादी को रखने के लिये दिया था। दादी गांव मे किसी काम से गई थी। मासूम बच्ची उसे ढूढ़ने निकल गई और फिर वापस नही लौटी। हालांकि पिता ने फेरी वाले को पैसे देकर कपड़े खरीद लिये लेकिन जिसके लिये खरीदे वह अब कभी लौटने वाली नही है। इस घटना का अनावरण करने मे पुलिस पूरी तरह नाकाम रही। रात करीब आठ बजे मां ने डायल 112 पर बेटी के गुम होने की सूचना दी। थोड़ी देर बाद गांव में पुलिस पहुंच गई और खोजबीन शुरू कर दी। देर रात मासूम की लाश घर से करीब दो सौ मीटर झाड़ियों में पड़ा मिला।


तीसरी घटना बस्ती जिले के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के रामपुर रेवटी गांव की है। यहां फेरी लगाने वाले हरि गुप्ता की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। घटना 04 फरवरी 2024 की है। घटना को दो साल बीत चुके हैं।पुलिस कातिलों तक पहुंचने मे नाकाम रही है। परिजनों ने बताया कि हरि को रात में तीन युवकों ने घर से बुलाया फिर धारदार हथियार से उसका गला काट दिया, युवक को मरा समझकर आरोपी मौके से भाग गए थे।


पीड़ित किसी तरह 800 मीट पैदल चलकर घर पहुंचा था। उसने घर के बाहर सो रहे पिता से कहा ‘‘मैं किसी तरह घर आया हूं तीन लोगों ने मुझे मारा है, मैं चिल्ला न सकूं, इसलिए पहले मुंह में कपड़ा ठूंस दिया, फिर हाथ बांध दिए। जब मुझे पीटकर उन लोगों का मन भरा, तो मेरा गला काटकर भाग गए। अंधेरे की वजह से मैं उन लोगों का चेहरा सही से नहीं देख पाया’’। परिजनों ने यह भी बताया कि बगैर कोई सूचना दिये कुछ लोग रात मे ही घर आये और हरि को अस्पताल पहुंचाने के लिये गाड़ी की व्यवस्था की। युवक को परिवार के लोग जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया लेकिन नतीजा सिफर रहा।


चौथी घटना कोतवाली क्षेत्र के पिकौरा दत्तुराय मोहल्ले की है। अविनाश सिंह के मकान में किराये पर रहने वाले मोहित यादव की 12 जुलाई 2024 को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। दिन दहाड़े अपहरण के बाद हत्या के इस केस में मोहित के मकान मालिक ने पांच नामजद व अन्य पर एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद मे सीसीटीवी फुटेज और गिरफ्तार आरोपियों के बयान के आधार पर नाम बढ़कर 20 हो गये थे।


मुख्य आरोपी इलहान सहित सभी गिरफ्तार किये गये। कुआनो नदी में शव फेंकने की बात सामने आई लेकिन किस जगह से शव फेंका गया इसका पता नहीं था। अनुमान के आधार पर चंगेरवा से बानपुर तक कई दिनों तक कुआनो नदी को NDRF की टीम ने मथा, लेकिन शव का पता नहीं चल पाया। शव बरामद न होने के कारण यह केस स्वयं कमजोर हो गया। शव की बरामदगी न करा पाना पुलिस की बड़ी नाकामी मानी गयी। यह ऐसी घटनायें हैं जो कभी नहीं भूलेंगी, हां इनमे पीड़ितों को इंसाफ मिला होता, अपराधियों को सजा मिली होती तो पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होता और लोगों के भीतर का भय निकल पाता। 


लेकिन ये घटनायें और पुलिस का खाली हाथ होना इस बात को रेखांकित करता है कि समाज के गरीब लाचार परिवारों के साथ होने वाली जघन्य घटनाओं और वीआईपी परिवारों के साथ होने वाली जघन्य घटनाओं में काफी अंतर है। कई बार अदालतों का पैमाना भी बदल जाता है और घटनायें परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे जाती हैं। आशंका है दरोगा हत्याकांड भी कहीं ठण्डे बस्ते न चला जाये। फिलहाल इन सभी मामलों में आज भी जनमानस को उम्मीद है। कहना है कि पुलिस चाहे तो सही अपराधी का चेहरा सामने आ जायेगा और उसे सजा मिलने पर सिर्फ पीड़ित परिवारों को नही बल्कि लाखों लोगों को सकून मिलेगा। 

Post a Comment

0 Comments

Below Post Ad

KALWARI

 

NAVYUG

 

SHARMA

 

BD GLOBAL
CMPM

 

SP AUTO
KRISHNA
PATEL S.M.H.
ST. JOSEPH
DRMS

Bottom Ad