लोकतंत्र के तीनों स्तम्भों की
तरह बजट मे पत्रकारों के लिये भी हो प्रावधान, भेजा ज्ञापन
There should be provision for journalists in the budget, memorandum sent
बस्ती, 13 फरवरी। उ.प्र. सरकार द्वारा पेश किये गये भारी भरकम बजट मे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के हेतु कोई प्रावधान न किये जाने से नाराज पत्रकारों ने नेशनल प्रेस क्लब के बैनर तले स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में लोकतंत्र की सुदृढ़ता हेतु पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुये आगामी वित्तीय संशोधन या अनुपूरक बजट में इस विषय पर ठोस निर्णय लिये जाने की मांग की गई है।
नेशनल प्रेस क्लब के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज का वह वर्ग है जो विपरीत परिस्थितियों में भी जनसरोकारों को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। ग्रामीण अंचलों से लेकर मंडल एवं जिला मुख्यालयों तक कार्यरत अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों में लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व निभाते हैं। सेवानिवृत्ति या असामयिक मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार आर्थिक असुरक्षा का सामना करते हैं। वर्तमान समय में महंगाई और सामाजिक दायित्वों को देखते हुए पात्रता मानकों को यथार्थपरक एवं सरल बनाते हुये एक सुदृढ़ एवं पारदर्शी पत्रकार पेंशन योजना की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ज्ञापन में पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा एवं आकस्मिक सहायता कोष की व्यवस्था भी किये जाने की मांग की गई है।
संरक्षक अशोक श्रीवास्तव ने कहा 140 करोड़ देशवासियों की गाढ़ी कमाई से लोकतंत्र के तीनो स्तंभों, कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका से जुड़े हुये लोगों का चूल्हा चक्की चल रहा है। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ से जुड़े पत्रकारों के लिये वर्तमान, भविष्य की कोई योजना न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कठिन परिस्थितियों मे दायित्वों का निर्वहन कर रहे पत्रकारों के लिये चिकित्सा, आवास की सुविधायें भी नही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा पत्रकारों के हित मे एक ठोस योजना बनाकर उसे लागू किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से अमर वर्मा, बृजेश तिवारी, संतोष श्रीवास्तव, रत्नेन्द्र पाण्डेय, जमीर अहमद, संदीप यादव आदि उपस्थित रहे।
















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