बस्ती मे गूंजा U.G.C. गो बैक नारा, सवर्ण आयोग के गठन की मांग
बस्ती, 09 फरवरी। सोमवार को यूजीसी की नई गाइडलाइन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन हुआ। हजारों की संख्या में विभिन्न संगठनों के लोग जीआईसी मैदान में इकट्ठा हुये। यहां से यूजीसी गो बैक, यूजीसी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुये प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां जमकर नारेबाजी हुई और लोग ज्ञापन देने के लिये डीएम को बुलाने की मांग करने लगे।
हालांकि जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन रिसीव किया। ज्ञापन में सवर्ण आयोग के गठन और यूजीसी की नई गाइडलाइन को वापस लेने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार लगातार सवर्ण समाज की उपेक्षा कर रही है और उनकी समस्याओं को अनसुना किया जा रहा है। यूजीसी बिल को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने शासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बिल उच्च शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है और इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा असर पड़ेगा।
राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष रामप्रताप सिंह, जन आंदोलन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अभयदेव शुक्ल के नेतृत्व में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और इसे निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसका खामियाजा छात्रों और शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा। कलेक्ट्रेट परिसर में सरकार विरोधी नारों से माहौल गर्म रहा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही सवर्ण आयोग का गठन नहीं किया और यूजीसी बिल को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने इसे अधिकारों और सम्मान की लड़ाई बताया, जिससे पीछे न हटने का संकल्प लिया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों में यूजीसी के नये नियमों को लेकर काफी गुस्सा देखा गया। कुछ लोगों ने कहा पहले हिन्दुओं मुसलमानों के बीच गहरी खाई पैदा की गई, अब ऐसा कानून बनाया जा रहा है जिससे हिन्दू ही आपस मे लड़ रहे हैं और शायद यही सरकार का मकसद भी है। आपको बता दें फिलहाल यूजीसी बिल मोदी सरकार के गले की हड्डी बन चुका है। लागू हो तो सवर्ण सड़क पर और न लागू हो तो दलित समाज सड़क पर। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार के एक फैसले से किस प्रकार वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं प्रबुद्धजन समान कानून व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

















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