ए.आर.टी.ओ. हाजिर हों...
बस्ती, 06 अप्रैल। छावनी थाना क्षेत्र में संचालित एक इंटर कालेज के नाबालिक बच्चों के द्वारा की गयी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सी डब्लू सी के चेयर पर्शन प्रेरक मिश्रा ने एआरटीओ प्रवर्तन से 10 अप्रैल तक स्पष्टीकरण तलब किया है, कहा है की यह अमानवीय कृत्य है इसे सहन नही किया जा सकता।
बताते चले की उक्त थाना क्षेत्र के ग्राम डुहवा मिश्र में संचालित एस एन एस बी इंटर कालेज के छात्रों ने न्यायपीठ को सम्बोधित पत्र में बताया है की 4 अप्रैल को हम लोग प्रातः काल स्कूल की बस से पढ़ने जा रहे थे, हम लोगों की बस हर्रेया थाना क्षेत्र के बड़हर पेट्रोल पम्प के पास जैसे ही पहुंची वैसे ही ए आर टी ओ बिभाग के लोगों ने बस को रुकवा लिया और बस चालक का मोबाइल छीन लिया, और कहा की वाहन की जाँच की जानी है इसलिए बस को हम लोग थाने पर ले जायेंगे, और बस में सवार बच्चों को बस से उतर जाने को कहा गया।
जब हम लोगों ने कहा की अंकल हम लोग बिना बस के अब स्कूल कैसे जायेंगे, पहले हम लोगों को स्कूल छोड़वा दीजिये तब बस लेकर जाईये, तब बिभाग के लोगो ने कहा की आप लोगों को स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी नही स्कूल प्रबंधन की हैं शिकायत पत्र मे बच्चों ने बताया है की इसके बाद हम लोगों को पैदल सुनसान राह से स्कूल जाने को विवश होना पड़ा, नाबालिक बच्चों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने इसे बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य, एवं बाल अधिनियम 2015 की मंशा के विपरीत मानते हुए ए आर टी ओ प्रवर्तन से स्पष्टीकरण माँगा है, चेयर पर्शन प्रेरक मिश्रा ने कहा की बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद ही एआरटीओ को कोई कार्यवाही करनी चाहिए थी।
पूरा वाकया
घटना 04 अप्रैल केी है। आपको बता दें एआरटीओ प्रवर्तन का पद इस वक्त ,खाली हैं पीटीओ प्रदेीप कुमार श्रीवास्तव एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनकी गैर जिम्मेदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चेकिंग के दौरान इनके सिपाहियों ने स्कूल बस के चालक को ड्राइविंग सीट से जबरिया उतार लिया और मोबाइल छीन ली।
ड्राइवर ने स्कूल को सूचना देने के लिये मोबाइल मांगा लेकिन प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने न तो मोबाइल दिया और न ही खुद स्कूल प्रबंधन को सूचित किया। प्रबंधक करूणाकर मिश्रा से बात करने पर पता चला कि बस की रजिस्ट्रेशन वैधता 7 महीने पहले समाप्त हो गई थी। जबकि परमिट 2029 तक बैध है। परमिट की बैधता देखकर स्कूल प्रबंधन भूलवश बस को संचालन के लिये फिट मानता रहा। उन्होने कहा बस पर 22 हजार रूपये जुर्माना लगा है यह तकलीफदेह नही है लेकिन स्कूल के बच्चों को जो तकली। हुई इसका कष्ट हमेशा रहेगा।











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