एम्बुलेंस सेवा के नाम पर लाखों का घोटाला, रडार पर जिम्मेदार
सिद्धार्थनगर, ब्यूरो (अवधेश मिश्र) जिले में संचालित 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा में फर्जी केस बनाकर सरकार को लाखों का चूना लगाने का आरोप लगा है। ग्राम दुफेड़िया, गौरा बाजार निवासी सच्चिदानन्द व शाहपुर निवासी रंगनाथ त्रिपाठी पुत्र बंशनाथ त्रिपाठी ने इटवा तहसील दिवस में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सेवा प्रदाता कंपनी के कर्मी अपना दैनिक टारगेट पूरा करने के लिए फर्जी केस बना रहे हैं।
डीबीआर और पीसीआर रजिस्टर में मुम्बई, गोण्डा, रायबरेली, बस्ती, बलरामपुर आदि जिलों के मोबाइल नंबरों से फर्जी कॉल दर्शाकर सरकार से प्रतिदिन लाखों रुपये का भुगतान लिया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि एक ओर असली जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल रही, वहीं दूसरी ओर फर्जी आधार कार्ड, पता व मरीज का नाम डीबीआर, पीसीआर में दर्ज कर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
आरोप है कि खुनियांव, इटवा, भनवापुर, डुमरियागंज, बेवा, तिलीली, खेसरहा, बांसी, बसन्तपुर, जोगिया, बढ़नी, शोहरतगढ़, बर्डपुर, लौटन, उस्का व जिला अस्पताल में तैनात कर्मियों पर कंपनी के अधिकारियों का दबाव है। रोजाना 102 एम्बुलेंस से 30-35 और 108 से 10-15 फर्जी केस बनाए जा रहे हैं। इससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
पांच माह का रिकॉर्ड खंगालने की मांग
शिकायतकर्ता ने डीएम से मांग की है कि जिले में तैनात सभी 108 और 102 एम्बुलेंस के पिछले 5 माह के डीबीआर, पीसीआर के रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए। इसमें दर्ज मरीज का नाम, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड व पते का सत्यापन कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। फर्जी केस प्रकरण में एम्बुलेंस प्रदाता कंपनी के जिले के अधिकारियों से 6 महीने का डीबीआर पीसीआर मांगा गया है जैसे ही उपलब्ध होता है इसकी जांच करवाते हैं जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।













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