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किसानों को प्रशिक्षण मे मिली कम लागत मे अधिक उत्पादन की जानकारी

किसानों को प्रशिक्षण मे मिली
कम लागत मे अधिक उत्पादन की जानकारी

बस्ती 07 अगस्त।
कृषि विज्ञान केन्द्र, बस्ती में 03 से 07 अगस्त तक किसानों एवं ग्रामीण युवाओं के लिए संरक्षित खेती विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इसमे किसानों को संरक्षित खेती की आधुनिक तकनीकों, कम लागत में अधिक उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण सब्जी उत्पादन, जल एवं पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप खेती के लिए प्रशिक्षित किया गया।  

       


प्रशिक्षण कार्यक्रम का मार्गदर्शन डॉ. एस. के. तोमर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, बस्ती ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने किसानों को संरक्षित खेती की उपयोगिता, आय वृद्धि एवं वर्षभर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पी. के. मिश्रा, वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) ने प्रशिक्षण के दौरान संरक्षित खेती की अवधारणा, महत्व एवं वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, लो-टनल एवं मल्चिंग जैसी संरक्षित खेती तकनीकों को अपनाकर किसान प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों एवं अन्य उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। 


उन्होंने जल एवं पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्मों के चयन तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पर विशेष बल दिया। डॉ. वी. बी. सिंह, वैज्ञानिक (आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन) ने उन्नत किस्मों एवं गुणवत्तापूर्ण बीज चयन की जानकारी दी। आर. वी. सिंह, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, समूह आधारित खेती तथा तकनीकी प्रसार के महत्व से अवगत कराया। डॉ. प्रेम शंकर, वैज्ञानिक (पादप संरक्षण) ने संरक्षित खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा समेकित कीट प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। डॉ. अंजली वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने सुरक्षित एवं पौष्टिक सब्जियों के पोषण महत्व, मूल्य संवर्धन तथा घरेलू उपयोग पर जानकारी दी। 


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