प्राकृतिक कृषि समय की मांग
नर्मदा, गुजरात (बीके पाण्डेय)। प्रकृति की गोद में बसे देडियापाडा के गढ़ गांव के किसान मथुर वसावा ने प्राकृतिक कृषि को अपनाकर अन्य किसानों को प्रेरणा प्रदान करने का काम कर रहे हैं। किसान ने अपने छह एकड़ जमीन में बारह माह की मिश्रित फसलों की खेती कर आजीविका हासिल कर रहे हैं। निरोगी जीवन जीने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील किसान ने की है।
फल फूल व अनाज की प्राकृतिक खेती करके किसान मथुर भाई काफी प्रसन्न दिख रहे हैं। इस साल उन्होने 64 मन आम की बिक्री की। प्राकृतिक कृषि समय की मांग है वहीं प्राकृतिक कृषि को लेकर केन्द्र व राज्य सरकार द्रारा देश के कोने - कोने में प्राकृतिक कृषि के महत्व के बारे में जागरुक करने के लिए किसानों के संवाद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में गुजरात सहित नर्मदा जिले में भी प्राकृतिक कृषि को गति मिल रही है।रासायनिक खेती मात्र जमीन को नही परंतु मानव स्वास्थय को भी नुकसान कर रहा है वहीं किसान भी प्राकृतिक कृषि का महत्व समझ रहे हैं।
देडियापाडा के गढ़ गांव के रहने वाले किसान मथुर भाई वसावा प्राकृतिक कृषि को अपनाकर संतोष व्यक्त कर रहे हैं। वसावा ने एक मुलाकात में मंगलवार को पत्रिका को बताया कि प्राकृतिक खेती आज के समय की जरुरत है। प्राकृतिक खेती में खर्चा नाममात्र का होता है व गुणवक्ता युक्त व ज्यादा उत्पादन मिलता है। उन्होने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र व आत्मा प्रोजेक्ट के अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होने प्राकृतिक कृषि के बारे में जानकारी व प्रशिक्षण हासिल किया।
उन्होने कहा कि शुरुआत में वह अन्य किसानों की भांति ही रासायनिक खाद व जंतुनाशक दवा का ज्यादा उपयोग करते थे जिससे जमीन का उपजाऊपन घटने के साथ उत्पादन में भी गिरावट आ गई थी। आज बीमारियो की बढ़ रही संख्या क ो देखते हुए सभी किसान भाईयों को प्राकृतिक कृषि करनी चाहिए। उन्होने बताया कि वर्ष 2017 से छह एकड़ जमीन में गाय आधारित खेती कर रहे हैं। घर पर ही जीवामृत बनाकर कम खर्च में प्राकृतिक खेती में से आवक को दोगुना कर दिए हैं। इस साल उन्होने 64 मन आम की बिक्री की। गांवों में भी वह प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जी की बिक्री करते हैं।
इन फसलों का कर रहे हैं उत्पादन
किसान मथुर भाई वसावा मिश्र प्राकृतिक खेती में आम की बगिया के अंदर अनेक प्रकार के आम व सब्जी की खेती कर रहे हैं। वह देशी लोबिया,मूंगफली,इलायची, नींबू व मक्का को बोते हैं। सीजन के अनुसार अलग अलग धान्य की फसल व तरबूज की भी खेती करते हैं। मंडप के भीतर विविध बेल वाली सब्जी जैसे कि लौकी,काला अंगूर आदि की खेती भई वह कर रहे हैं।













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