Type Here to Get Search Results !

Bottom Ad

हाथरस हादसे का जिम्मेदार कौन ?

हाथरस हादसे का जिम्मेदार कौन ? 

Who is responsible for Hathras accident?



यूपी डेस्कः
हाथरस में एक पाखंडी के सत्संग में अव्यवस्था के चलते अचानक भगदड़ मचने से अब तक 122 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है अनेक महिलायें और बच्चों को भीड़ ने ही कुचल दिया। इस हादसे के बाद एक बड़ा सवाल उठा है आखिर किसी नेता और पाखंडी को सत्संग या कथा के नाम पर इतनी बड़ी जुटाने की इजाजत क्यों दी जाती है। 


इसका जिम्मेदार कौन है। 122 मौतों और अनेक परिवारों की बरबादी की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या स्थानीय प्रशासन, खुफिया तंत्र को भीड़ की जानकारी नही थीं ? अगर थी तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नही किये गये ? लाशों का ढेर देखकर लोगों के होश उड़ गये। आरोप यह भी है कि निकट के अस्पताल में जब लोगों को ले जाया गया तो वहां जरूरी सुविधायें नही थीं। फिलहाल घटना के बाद सीएस मनोज कुमार सिंह और डीजीपी प्रशांत कुमार मौके पर पहुचकर कैंम्प कर रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है उनको शीघ्र गिरफ्तार किया जायेगा और सख्त कार्यवाही होगी।

कौन हैं भोले बाबा

भोले बाबा का असली नाम सूरज पाल उर्फ नारायण हरि और वह एटा के रहने वाले हैं। खुद की आर्मी बना रखी है। बाबा पर यौन शोषण समेत 5 मामले दर्ज हैं। उनका कनेक्शन सियासत से भी है। कुछ मौकों पर यूपी के कई बड़े नेताओं को उनके मंच पर देखा गया। इसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम भी शामिल है। भोले बाबा उर्फ सूरज पाल एटा जिले के बहादुर नगरी गांव के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई एटा जिले में हुई। वह कांशीराम नगर में पटियाली गांव के रहने वाले हैं। बचपन में पिता के साथ खेती-किसानी करते थे। जवान हुए तो पुलिस में भर्ती हो गए। उनकी पोस्टिंग यूपी के 12 थानों के अलावा इंटेलिजेंस यूनिट में रही।


भोले बाबा अपने समागम में दावा करते हैं 18 साल की नौकरी के बाद उन्होंने 90 के दशक में वीआरएस ले लिया। हालांकि, सच इससे बिलकुल अलग है। यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल की नौकरी के दौरान 28 साल पहले बाबा इटावा में भी पोस्टेड रहे। नौकरी के दौरान यौन शोषण का मुकदमा लिखे जाने के बाद उन्हें पुलिस विभाग से बर्खास्त किया गया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने अपना नाम और पहचान बदल लिया। और बाबा बन गए। उनकी पत्नी भी समागम में साथ रहती हैं। वह किसी अन्य बाबा की तरह भगवा पोशाक नहीं पहनते। वह अपने सत्संग में सफेद सूट और सफेद जूते में नजर आते हैं। कई बार कुर्ता-पैजामा और सिर पर सफेद टोपी भी लगाकर सत्संग करने पहुंचते हैं। अपने पाखंड के दम पर उन्होने लाखों भक्त बना रखे हैं।


वे अक्सर अपने समागम में कहते हैं उन्हें नहीं मालूम कि सरकारी नौकरी से अध्यात्म की ओर खींचकर कौन लाया? नौकरी से वीआरएस लेने के बाद भगवान से साक्षात्कार हुआ। भगवान की प्रेरणा से पता चला, यह शरीर उसी परमात्मा का अंश है। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन मानव कल्याण में लगाने का फैसला कर लिया। भोले बाबा की खुद की आर्मी है, जिन्हें सेवादार कहा जाता है। हर मंगलवार को होने वाले कार्यक्रम की पूरी कमान यही सेवादार संभालते हैं। सेवादार देश से आने वाले श्रद्धालुओं के पानी, भोजन से लेकर ट्रैफिक की व्यवस्था करते हैं। भोले बाबा के सत्संग में जो भी भक्त जाता है, उसे वहां पानी बांटा जाता है। बाबा के अनुयायी ऐसा मानते हैं कि इस पानी को पीने से उनकी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।


भारत में धर्म पूरी तरह व्यापार का रूप ले चुका है। कोई भी पाखंडी धर्म के नाम पर, लोगों का कल्याण करने का झांसा देकर लाखों की भीड़ इकट्ठा कर सकता है। हादसा होने के बाद शासन निलंबन और तबादले का खेल खेलने में जुट जाता है, किन्तु यह समाधान नही है। डिजिटल जमाने में इतनी भीड़ इकट्ठा करने की अनुमति आखिर क्यों प्रदान की जाती है ?


ताजा खबर है कि पाखंडी बाबा मैनपुरी के एक आश्रम में रूका हुआ है, पुलिस फोर्स ने चारों ओर से आश्रम को कवर कर रखा रखा है। एक तरह से बाबा हाउस अरेस्ट हो चुके हैं। उनके गिरफ्तारी की घोषणा कभी भी हो सकती है। 

Post a Comment

0 Comments

Below Post Ad

GAUTAM BUDDH

 

SHARMA

 

BD GLOBAL
CMPM

 

SP AUTO
KRISHNA
PATEL S.M.H.
ST. JOSEPH
DRMS

Bottom Ad