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नोयडा पुलिस के हत्थे चढ़ा जालसाज टी0टी0ई0

नोयडा पुलिस के हत्थे चढ़ा जालसाज टी0टी0ई0
गौतमबुद्ध नगर, (ओ पी श्रीवास्तव)।
नोएडा पुलिस ने रेलवे विभाग में टी0टी0ई0 के पद पर नौकरी दिलाने एवं शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर लाखो रूपये की धोखाधड़ी करने वाले फर्जी टी0टी0ई को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 07 फर्जी नियुक्त पत्र, 03 मोबाइल आदि सामान भी बरामद हुआ है। पुलिस ने अभियुक्त को न्यायालय भेजा जहां से उसे जेल भेज दिया गया।


उक्त सम्बन्ध में जानकारी देते हुए डी सी पी शक्ति मोहन अवस्थी ने सोमवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि आज थाना सेक्टर 63 पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस एवं गोपनीय सूचना के आधार पर कार्यवाही करते हुये रेलवे विभाग में टी0टी0ई0 के पद पर नौकरी दिलाने एवं शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अभियुक्त प्रशान्त कुमार गुप्ता पुत्र आनन्द कुमार को बहलोलपुर अंडरपास से एफएनजी गोल चक्कर की तरफ जाने वाली सर्विस रोड पर ग्रीन बेल्ट के गेट के पास से गिरफ्तार किया गया है।

 

डीसीपी ने कहा  कि 27 अप्रैल को लिखित शिकायत मिली कि प्रशांत नाम के व्यक्ति ने वादी से शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर 71,000 रूपये एवं उसके भांजे को रेलवे विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 1,71,000 रूपये की धोखाधडी की गयी है। इसके सम्बन्ध में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। डीसीपी ने बताया कि अभियुक्त अपने आप को रेलवे विभाग नई दिल्ली में टी0टी0ई0 के पद पर नियुक्त तथा रेलवे विभाग, पुलिस विभाग तथा डी0एम0 कार्यालय जनपद गौतमबुद्ध नगर में अच्छी पकड़ होना बताता था। कहता था कि यदि उपरोक्त विभागो से सम्बन्धित कोई कार्य हो तो मुझे बताना। 


माह नवम्बर 2024 में शिकायतकर्ता के पास कॉल कर अभियुक्त प्रशांत गुप्ता ने कम्पनी में वेकेंसी होने एवं नौकरी दिलाने की बात की थी तथा उस समय अपना नाम विशाल बताया था। करीब 01 सप्ताह बाद अभियुक्त प्रशांत कुमार गुप्ता प्रार्थी की कम्पनी जी-172 सैक्टर 63 के बाहर मिला और अपने को रेलवे विभाग में टी0टी0ई0 के पद पर कार्यरत बताते हुए अपनी नियुक्ति नई दिल्ली में बतायी। प्रशांत से उसकी आईडी मांगी गयी तो उसने अपना आधार कार्ड व रेलवे की आईडी दिखायी, जिन पर उसका नाम प्रशांत कुमार गुप्ता अंकित था। पूछा गया कि आपने तो अपना नाम विशाल बताया था तब अभियुक्त द्वारा बताया गया कि मेरा घर का नाम विशाल है।


शिकायतकर्ता को अपना शस्त्र लाइसेंस बनवाना था, जिस सम्बन्ध में अभियुक्त से बात की गयी तो उसने लाइसेंस बनवाने के नाम पर उपलब्ध कराये गये फोन-पे पर भिन्न-भिन्न तिथियो में 71,000 रूपये ऑनलाइन लिये थे। उसने यह भी बताया था कि रेलवे विभाग में कोटे की कुछ वेकेंसी निकली है अगर आपका कोई परिचित हो तो मैं उसको रेलवे विभाग में नौकरी दिला सकता हूँ तथा उसने नोर्दन रेलवे में टी0टी0ई0 के पद पर चयनित हुए कुछ व्यक्तियों के नियुक्ति पत्र दिखाये और बताया गया कि यह सभी मेरे द्वारा ही रेलवे विभाग में भर्ती कराये गये है। दिखाये गये नियुक्ति पत्रो को देखकर पूर्ण विश्वास कर अपने भांजे की नौकरी के लिए 1,00,000 रूपये नगद दिये थे। 

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