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प्राणघातक है रेबीज, समय से लगवायें टीका- I.M.A.



प्राणघातक है रेबीज, समय से लगवायें टीका- I.M.A.
Rabies is fatal, get vaccinated on time - I.M.A.
बस्ती, 01 अक्टबूर। “विश्व रेबीज दिवस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बस्ती के तत्वावधान में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। आई०एम०ए० अध्यक्ष डा० अनिल कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में तमाम चिकित्सकों ने भाग ले कर रेबीज़ जैसी प्राण घातक बीमारी से बचाव, टीकाकरण एवं जन जागरण हेतु अपने-अपने विचार साझा किये।


डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा एक जिम्मेदार व्यक्ति होनें के नाते आपको रेबीज के बारे में खुद को और दूसरों को जागरूक करने हेतु ठोस कदम उठाने होंगे। अपने पालतू जानवरों का टीकाकरण समय से कराएं। यह किसी का व्यक्तिगत कार्य नहीं है बल्कि सभी के साथ मिल कर यह सुनिश्चित करना है कि किसी संक्रमित व्यक्ति का उचित देख-भाल हो ताकि 2030 तक के वैश्विक लक्ष्य को हासिल किया जा सके। चिकित्सकों ने बताया की रेबीज़ एक प्राण-घातक बीमारी है जोकि मष्तिष्क व् रीड की हड्ड्ड्डियों के साथ तंत्रिका तंत्र पर रैबड़ो वाइरस के कारण हमला करता है जिसके कारक विशेष रूप से संक्रमित कुत्ते, चमगादड़, बिल्लियाँ, गाय, घोड़े, गधे आदि होते हैं।


विशिष्ट अतिथि पशु चिकित्सक डा० सुरेन्द्र कुमार चौधरी ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व आंकड़े के अनुसार 59000 मौतें रेबीज़ के कारण हुई हैं जिसमें अनुमानित 5000 मौतें भारत में हुई है। उन्होंने बताया कि कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण करके करीब 70 फीसद संक्रमण को रोका जा सकता है। कुत्ता या अन्य जानवरों के काटने पर घाव को तुरंत साबुन लगा कर बहते हुए पानी से 15 मिनट तक साफ करें। टॉका न लगवाएं या पट्टी न बाँधे बल्कि साथ ही (सेल कल्चर टीका) एवं टिटनस से बचाव का टीका भी लगवाएं।


डा० अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा की आवारा कुत्तों के लिए भी कुछ प्रबंध करना चाहिए क्योकि ज्यादातर आवारा कुत्तों के ही शिकार 40 प्रतिशत बच्चे होते हैं जिनकी उम्र आमतौर पर 15 वर्ष से कम होती है।ं निष्कर्ष रूप में कहें तो रेबीज़ 100 प्रतिशत रोकी जा सकती है, समय पर घाव की बताये अनुसार सफाई व वैक्सीन साथ ही कुत्तों का टीकाकरण ही कुंजी है। इस अवसर पर आई० एम० ए० के संरक्षक डा० के० के० तिवारी, पूर्व अध्यक्ष डा० नवीन कुमार, सचिव डा०एन० के० चौधरी, उपाध्यक्ष डा० अश्वनी कुमार सिंह, डा० ए०पी०डी० ‌द्विवेदी, डा० एम० एम० सिंह, डा० ए०सी० श्रीवास्तव, डा०पी० के० श्रीवास्तव, डा० दीपक श्रीवास्तव, डा० सी० एल० कनौजिया, डा० अनिल कुमार चौधरी, डा० एस० पी० चौधरी, डा० पवन मिश्र एवं डा० आनंद कुमार सिंह समेत तमाम चिकित्सक मौजूद रहे।


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