रूधौली में निकली प्रेक्सिस विद्यापीठ की रैली,
मनमोहक किरदारों में दिखे नौनिहाल
रुधौली, बस्ती (अनूप बरनवाल) 77 वें गणतंत्र दिवस पर नगर पंचायत रुधौली में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर देशभक्त का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। प्रेक्सिस विद्यापीठ के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने जब सड़कों पर कदम बढ़ाया, तो पूरा नगर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से गूंज उठा। देश की आज़ादी, संविधान और लोकतंत्र की ताकत को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निकाली गई इस भव्य रैली ने गणतंत्र दिवस समारोह को एक नई प्रेरणा दी।
रैली में बच्चों ने भारत माता, भूकंपरोधी, रानी लक्ष्मीबाई, ब्लैक कमांडो जैसे किरदारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर यह दिखा दिया कि देश का भविष्य न केवल सुरक्षित है, बल्कि सजग और जागरूक भी है। लोगों ने जगह जगह रुककर बच्चों के इस अद्भुत प्रदर्शन को देखा और जमकर तालियाँ बजाईं। यह ऐतिहासिक आयोजन विद्यालय के डायरेक्टर सुशांत पाण्डेय के नेतृत्व एवं प्रधानाचार्य पंकज शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। बच्चों की अनुशासनबद्ध प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है।
रैली के बाद विद्यालय प्रांगण में देशभक्ति गीत, राष्ट्रगीत, नाटक, हिंदी-अंग्रेज़ी भाषण, भारत के भौगोलिक स्वरूप और संविधान की विस्तृत जानकारी पर आधारित कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संसद की कार्यवाही कार्यक्रम का सबसे तीखा, सशक्त और सराहनीय हिस्सा रहा। संसद की कार्यवाही का जीवंत मंचन। बच्चों ने लोकतंत्र की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और संविधान की उपयोगिता को इस अंदाज़ में प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। उपस्थित लोगों ने इसे “सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति” करार दिया।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने शिक्षकों और अभिभावकों का अहम योगदान रहा। वाइस प्रिंसिपल गिरजेश साहू, शिक्षकगण दीनबंधु, अभिषेक, श्रेयांश, कोमल बरनवाल, अजीज खान, अभय, पूनम, श्रेया, श्वेता, सुष्मिता की मेहनत साफ झलकी। वहीं कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकगण भाजपा जिलाउपाध्यक्ष रविप्रताप सिंह संजय गुप्ता, राजकुमार त्रिपाठी, देवनारायण पाण्डेय, चंद्रप्रकाश बरनवाल, हेमंत पाण्डेय, पवन, पं. जनार्दन पाण्डेय, अजीजुर्रहमान सहित बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे। माँ सरस्वती और माँ भारती के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रमों की शुरूआत हुई।













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