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Rudhauli- Basti जिसको मृत समझ रहे थे, वह 7 साल बाद राजस्थान में जिंदा मिली



जिसको मृत समझ रहे थे, वह 7 साल बाद राजस्थान में जिंदा मिली
A woman believed dead was found alive in Rajasthan after 7 years.
बस्ती, 11 फरवरी। कप्तानगंज थाना क्षेत्र से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस, अदालत और समाज तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस बेटी की हत्या के आरोप में मां-बाप दो साल तक बदनामी और मुकदमे का दंश झेलते रहे, वही बेटी अचानक जिंदा हालत में थाने पहुंच गई। कागजों में ‘मृत’ घोषित प्रियंका जब पुलिस के सामने खड़ी हुई तो हर कोई सन्न रह गया।


पिलखायें गांव की प्रियंका प्रजापति की शादी 14 मई 2017 को संदीप से हुई थी। एक बेटा भी हुआ, लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में दरार आ गई। दो साल पहले प्रियंका ससुराल से जेवर लेकर मायके आई और फिर अचानक लापता हो गई। इसी बीच गांव में सनसनीखेज अफवाह उड़ीकृपिता ने जेवर के लालच में बेटी और नाती की हत्या कर लाश सरयू में फेंक दी! पति ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत के आदेश पर 4 नवंबर 2024 को पिता दयाराम, मां सुभावती, रिश्तेदार संजना और अशोक कुमार मौर्य पर हत्या और साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज हो गया।


बिना लाश, बिना सबूतकृमां-बाप ‘हत्यारे’ घोषित कर दिए गए। सच्चाई इससे बिल्कुल उलट निकली। प्रियंका आत्महत्या के इरादे से अयोध्या पहुंची थी, लेकिन वहां उसकी मुलाकात राजस्थान के मंगल चंद्र से हुई। आत्महत्या का इरादा बदल गया और वह उसके साथ राजस्थान चली गई। दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। उधर बस्ती में उसके माता-पिता हत्या के आरोपी बनकर सामाजिक तिरस्कार झेलते रहे। कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पति संदीप के मोबाइल पर प्रियंका के आधार कार्ड में बदलाव का ओटीपी आया। 


शक गहराया, पुलिस हरकत में आई और आखिरकार प्रियंका राजस्थान में जिंदा मिल गई। दो साल से ‘मरी हुई’ महिला खुद चलकर थाने पहुंच गई। सच्चाई सामने आने के बाद माता-पिता पर से हत्या का कलंक तो मिटा, लेकिन रिश्तों की डोर पूरी तरह टूट चुकी है। मां-बाप उसे अपनाने को तैयार नहीं। पति भी साथ रखने से इंकार कर रहा है। प्रियंका अपने नए साथी मंगल चंद्र के साथ ही रहना चाहती है। बेटा अब अपने जैविक पिता संदीप को पिता मानने को तैयार नहीं। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सवाल है क्या सिर्फ अफवाह के आधार पर किसी को हत्यारा बना देना इतना आसान है? दो साल तक बेगुनाह माता-पिता समाज और कानून के कटघरे में खड़े रहे। अब उनकी खोई इज्जत कौन लौटाएगा ?

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