Basti: उद्यान विभाग व फर्म पर
लगाए गंभीर आरोप, किसान के डूबे 42 लाख
संवाददाता, बस्ती, 27 मार्च। देशभर में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही एकीकृत बागवानी विकास मिशन पर उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यहां एक किसान ने आरोप लगाया है कि पॉलीहाउस स्थापना में अनुदान का झांसा देकर उससे लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन तीन साल बाद भी परियोजना अधूरी है और जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विकास खंड कप्तानगंज के बढ़नी गांव निवासी किसान आलोक रंजन वर्मा का कहना है कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2023 में उन्हें 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र में हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित करने के लिए योजना के तहत चुना गया। परियोजना की कुल लागत लगभग 58 लाख रुपये आंकी की गई, जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान का आश्वासन दिया गया था। किसान के अनुसार, उद्यान विभाग की ओर से नैतिक एग्री नामक फर्म को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया। आरोप है कि फर्म ने बैंक के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में करीब 42 लाख रुपये वसूल लिए, लेकिन आज तक पॉलीहाउस का निर्माण पूरा नहीं किया गया। अब फर्म के प्रतिनिधि संपर्क में भी नहीं हैं।
विभागीय भूमिका पर गंभीर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। किसान का आरोप है कि उसने कई बार जिला उद्यान अधिकारी और मंडलीय स्तर के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन तीन साल में भी न तो जांच पूरी हुई और न ही फर्म के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई। इससे विभाग और फर्म के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
दोहरी मार झेल रहा किसान
पॉलीहाउस में जरबेरा जैसी व्यावसायिक फसल उगाने की तैयारी में किसान पहले ही भारी निवेश कर चुका है। खेत में गोबर की खाद, लगभग 50 क्विंटल नीम खली और अन्य पोषक तत्व डाले जा चुके हैं। अब निर्माण अधूरा होने के कारण खेती शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि खेत में अत्यधिक खरपतवार उग आने से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। किसान का कहना है कि जब तक फर्म द्वारा कार्य पूर्ण कर आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती, तब तक अनुदान की राशि जारी नहीं होगी। ऐसे में उसकी पूरी पूंजी फंसी हुई है और आजीविका पर संकट गहरा गया है। किसान आलोक रंजन वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वह राज्य और केंद्र स्तर पर शिकायत दर्ज कराएंगे और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
यह है स्कीम
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत हाईटेक पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती बेहद मुनाफे वाला व्यवसाय है, लागत पर 50 फीसद सरकारी अनुदान मिलता है। इस खेती से प्रतिवर्ष 8-10 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो सकती है। यह खेती नियंत्रित वातावरण में ड्रिप सिंचाई द्वारा की जाती है। इस योजना के तहत करीब 4 हजार वर्ग मीटर में पाली हाउस की स्थापना और जरबेरा की खेती के लिए कुल स्थापना लागत पर करीब 29.50 की सब्सिडी किसान को दी जाती है।

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