सीडब्लूसी के निशाने पर एआरटीओ,
बाल हितों की अनदेखी का आरोप
बस्ती, 18 अप्रैल। स्कूल के नाबालिग बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य किये जाने के सम्बन्ध मे सीडब्लूसी ने एआरटीओ से स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन लापरवाह अफसर ने नोटिस को रद्दी की टोकरी मे डाल दिया। अफसर ने पहले बाल हितों की अनदेखी की और अब सीडब्लूसी की नोटिस को भी दरकिनार कर दिया। सीडब्लूसी के चेयरमैन प्रेरक मिश्रा के अनुसार यह अत्यन्त खेदजनक है, जो आपकी लापरवाही को दर्शाता है। उपरोक्त संदर्भ मे बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने एआरटीओ को पुनः निर्देशित किया है कि 22 अप्रैल 2026 तक अपना स्पष्टीकरण न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करे।
उन्होने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसा न करने पर यह मान लिया जायेगा कि एआरटीओ को अपना पक्ष रखने, स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने में कोई रूचि नहीं है। ऐसी दशा मे एआरटीओ के विरूद्ध बाल अधिनियम 2015 के तहत विधिक कार्यवाही की जा सकती है।
बताते चले की छावनी थाना क्षेत्र के ग्राम डुहवा मिश्र में संचालित एस एन एस बी इंटर कालेज के छात्रों ने न्यायपीठ को सम्बोधित पत्र में बताया है की 4 अप्रैल को हम लोग प्रातः काल स्कूल की बस से पढ़ने जा रहे थे। हम लोगों की बस हर्रेया थाना क्षेत्र के बड़हर पेट्रोल पम्प के पास जैसे ही पहुंची वैसे ही आर टी ओ विभाग के लोगों ने बस को रुकवा लिया और बस चालक का मोबाइल छीन लिया, कहा की वाहन की जाँच की जानी है इसलिए बस को हम लोग थाने पर ले जायेंगे, और बस में सवार बच्चों को बस से उतर जाने को कहा गया।
जब हम लोगों ने कहा की अंकल हम लोग बिना बस के अब स्कूल कैसे जायेंगे, पहले हम लोगों को स्कूल छोड़वा दीजिये तब बस लेकर जाईये, तब बिभाग के लोगो ने कहा की आप लोगों को स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी नही स्कूल प्रबंधन की हैं। जानकारी मिली है कि एआरटीओ की गैरमौजूदगी मे प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को चार्ज मिला हुआ था और जांच उन्ही के द्वारा की जा रही थी। सीडब्लूसी ने इसे घोर लापरवाही और अमानवीय कृत्य बताते हुये स्पष्टीकरण तलब किया है जिसे एआरटीओ ने रद्दी की टोकरी मे डाल दिया है।












Post a Comment
0 Comments