विधवा महिला को घर से निकालकर, कराया
फर्जी वसीयत पर 3 करोड़ का लोन, पीड़िता ने लगाई न्याय की गुहार
गोरखपुर, 20 जुलाई। नगर के कोतवाली थाना अंतर्गत दिलेजाकपुर मोहल्ले से धोखाधड़ी और जबरन बेदखली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित महिला कुसुम जायसवाल ने अपने पट्टीदारों (रिश्तेदारों) पर फर्जी वसीयत बनाकर करोड़ों का बैंक लोन लेने और प्रशासन की मिलीभगत से उन्हें उनके ही घर से बेदखल करने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित कुसुम जायसवाल (पत्नी स्वर्गीय अशोक कुमार जायसवाल) के अनुसार, उनके ससुर स्वर्गीय मोतीलाल जायसवाल ने करीब 60 वर्ष पूर्व अपनी पारिवारिक आय से अपनी पत्नी गोमती देवी के नाम पर दिलेजाकपुर (मकान नंबर 124) में जमीन खरीदकर मकान बनवाया था। मोतीलाल जायसवाल के तीन बेटे थेकृ अजय कुमार, अशोक कुमार और विजय कुमार। कुसुम जायसवाल के पति अशोक कुमार की मृत्यु लगभग 20 वर्ष पहले (वर्ष 2004 में) हो चुकी है, और वह शादी के समय से ही इसी घर में अपने बच्चों के साथ रह रही थीं।
3 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
आरोप है कि कुसुम जायसवाल के पट्टीदारों (अजय जायसवाल और विजय जायसवाल) ने उनकी सास (गोमती देवी, जिनकी मृत्यु 2023 में हो चुकी है) के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की। इस फर्जी वसीयत के आधार पर आरोपियों ने मकान को दिखाकर प्ब्प्ब्प् बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (च्छठ) से लगभग 3 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। इतना ही नहीं, इसी फर्जी दस्तावेज के सहारे नगर निगम में अपना नाम दर्ज कराने का आदेश भी करा लिया।
मामला न्यायालय में लंबित
पीड़िता ने बताया कि इस जालसाजी के खिलाफ अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। पीड़िता का आरोप है कि बीते 14 जुलाई को पट्टीदारों (अजय जायसवाल, विकास जायसवाल, विशाल जायसवाल) ने बैंक कर्मचारियों से सांठगांठ की। बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के, बैंक कर्मी, भारी पुलिस बल, नगर नायब तहसीलदार और अमीन के साथ जबरन उनके घर में घुस गए। विरोध करने पर उनके साथ बल प्रयोग किया गया, हाथ पकड़कर जबरन घर से बाहर खींच लिया गया और घर का ताला तोड़ दिया गया।
पीड़िता गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उनका आधार कार्ड, राशन कार्ड, जरूरी कागजात, ज्वेलरी, बर्तन, कपड़े और पूजा के सामान सहित पूरे घर को जबरन सील कर उन्हें बेघर कर दिया गया। वर्तमान में हृदय रोग (हार्ट की बीमारी) से पीड़ित और लाचार विधवा महिला अपने इकलौते बेटे के साथ किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। बताया कि इससे पूर्व भी उनके पट्टीदारों ने उनके ससुर की दो संपत्तियां बेच दी थीं, जिसमें से उन्हें कुछ नहीं मिला। मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। वह इस मकान की एक-तिहाई हिस्सेदार हैं, इसलिए जब तक न्यायालय से अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उन्हें पुनः उनके घर में प्रवेश दिया जाए और रहने की अनुमति दी जाए।











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