रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का
C.E.O. बनाये जाने हेतु राजेन्द्रनाथ तिवारी ने किया आवेदन
बस्ती, 16 जुलाई। वरिष्ठ भाजपा नेता, एवं पत्रकार राजेन्द्रनाथ तिवारी श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ के लिये आवेदन किया है। उन्होने स्वयं बायोडाटा भेजकर अपना योगदान गिनाते हुये सीईओ बनाये जाने की इच्छा जाहिर की है। श्री तिवारी को तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सीईओ बनाये जाने से न केवल एक जमीनी कार्यकर्ता को सम्मान मिलेगा बल्कि इस बात की गारण्टी होगी कि अभी हाल मे जिस प्रकार की घटना हुई है कम से कम उनके कार्यकाल मे इसकी पुनरावृत्ति नही होगी। वे सीईओ की सम्पूर्ण अर्हतायें पूरी करते हैं, बस ट्रस्ट के संचालकों को श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास को सर्वोपरि मानते हुये निष्पक्ष व पारदर्शी निर्णय लेना है।
राजेन्द्रनाथ तिवारी ने अपना सारा जीवन संघ एवं भाजपा की सेवा मे खपा दिया। पूरा जीवन हवन करने के उपरान्त उम्र के आखिरी चरण मे कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष की कुर्सी उनके हिस्से मे आई। हालांकि यह उनके त्याग व समर्पण का प्रतिफल नही कहा जा सकता, एक ताह से यह उनका अवमूल्यन था। फिर भी उन्होने बैंक को संकट से उबारने की हर संभव कोशिश की। उनके अनुभव, उनकी वैचारिक समृद्धि, तार्किक क्षमता, वेदों उपनिशदों का ज्ञान, रामजन्म भूमि आन्दोलन मे सक्रिय भागीदारी और भारत से नेपाल तक हिन्दुत्व व संघ का निर्विवाद परचम फहराने मे कोई कोर कसर नही छोड़ा।
उम्र के चौथेपन मे होने के बावजूद उनकी इच्छाशक्ति नौजवानों से कम नही है। ऐसा प्रायः तब होता है जब समाज, संगठन या शासन सत्ता किसी की योग्यता को कमतर आंकता है। सांसद, विधायक, प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री किसी भी किरदार के लिये उनका व्यक्तित्व बौना नही है। अफसोस इस बात का है कि यह कालखण्ड ही ऐसा है जिसके खांचे मे श्री तिवारी सरीखे लोग फिट नही बैठते हैं।
वैचारिक समृद्धि के कारण श्री तिवारी चापलूसी नही कर पाते। श्री तिवारी ही क्यों जो सिद्धान्तों और वसूलों का धनी होगा उसके लिये हर किसी कां खुश कर पाना नामुमकिन होता है। मौजूदा कालखण्ड मे आगे बढ़ना है तो सबसे पहले चापलूसी आनी चाहिये, बाकी योग्यतायें गौण हैं। वैसे जनता लनार्दन का मानना है कि चढावा चोरी के बाद ट्रस्ट के ढांचे मे जो परिवर्तन किया जा रहा है वह केवल दिखावा है। किरदार बदलने से कुछ नही होगा। सिद्धान्तों को ही समूल बदलने की जरूरत हैं, वरना बदल बदल कर किरदार आते रहेंगे और ऐसा दुस्साहस करते रहेंगे।
राजेन्द्रनाथ तिवारी के पास भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, सेवा, सुशासन एवं राष्ट्रनिर्माण की भावना से प्रेरित होकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सेवा में अपने पाँच दशकों से अधिक के संगठनात्मक, प्रशासनिक, साहित्यिक, पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र का अनुभव है। सही मायने मे वे एक राष्ट्रवादी चिंतक हैं। उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और समाजसेवा को समर्पित रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में भारत एवं नेपाल में संगठनात्मक कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। नेपाल के जनमत संग्रह के समय राष्ट्रवादी जनजागरण में उनका सक्रिय योगदान दिया।
श्री तिवारी ने वर्ष 1984 में प्रारंभ हुए श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से आरंभिक चरण से ही जुड़कर विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों एवं जनजागरण कार्यों में सक्रिय सहभागिता की। श्रीराम जन्मभूमि संघर्ष समिति, जनपद बस्ती के प्रथम जिला अध्यक्ष के रूप में आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। अयोध्या से लखनऊ तक आयोजित पदयात्रा सहित अनेक कार्यक्रमों में सहभागी रहे। सरयू तट पर लिए गए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के संकल्प का सहभागी बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।
श्री तिवारी परास्नातक, विद्यावाचस्पति हैं। उनका मानना है कि लिए श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि आदर्श शासन, सत्य, सेवा, करुणा, न्याय और मर्यादा के शाश्वत प्रतीक हैं। यदि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सेवा का अवसर मिलता है, तो वे किसी पद का अधिकारी नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के कार्य का एक समर्पित सेवक मानकर कार्य करूँगा। उनकी प्राथमिकता होगी कि ट्रस्ट की व्यवस्थाएँ पारदर्शी, अनुशासित, श्रद्धालु-केंद्रित तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप हों।









Post a Comment
0 Comments