सिद्धनाथ रेप, मर्डर केस मे हाईकोर्ट सख्त,
डीजीपी के व्यक्तिगत देखरेख मे होगी कार्यवाही
पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी को नोटिस
बस्ती, 04 अगस्त। जिले के दो अलग अलग थाना क्षेत्रों में हुई गंभीर आपराधिक मामलों का खुलासा न होना पुलिस के माथे पर किसी कलंक से कम नही है। पहला मामला लालगंज थाना क्षेत्र के सिद्धनाथ गांव का है, जहां घटना 18-19 मई 2025 को रोंगटे खड़े कर देने वाली हैवानियत हुई थी। यहां पांच साल की मासूम अलित बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बोथ साइड रेप किया गया था।
पैर पकड़कर पत्थर पर कई बार पटका गया और इसके बाद भी दरिंदों का मन नही भरा तो गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। घर से कुछ दूरी पर झाड़ी मे उसका शव मिला था। वह दादी के कहने पर गांव मे आये किसी फेरी वाले को बुलाने गई थी जिससे कुछ सामान खरीदना चाहती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे जो सच सामने आया उसे सार्वजनिक रूप से कहा भी नही जा सकता। एसपी अभिनंदन के नेतृत्व मे पुलिस ने बहुत हाथ पांव मारा, सफलता नही मिली तो इसे ठंडे बस्ती मे डाल दिया। ये मामला फिर से जाग गया है।
इस दुष्कर्म एवं हत्या के बहुचर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। भीम युवा वाहिनी संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मामले में व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भीम युवा वाहिनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रशासन द्वारा आरोपियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लगातार पैरवी और न्यायालय में उठाए गए प्रयासों के बाद हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए 30 जुलाई 2026 को डीजीपी को निर्देश जारी किए।
कहा गया है कि हाईकोर्ट ने आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी उचित कार्रवाई करने तथा तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। संगठन का यह भी दावा है कि मामले की निगरानी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनू राव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता हनुमानदीन वर्मा की देखरेख में की जा रही है। राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग (भारत सरकार) ने भी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, बस्ती को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर संबंधित प्रकरण में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
भीम युवा वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनू राव ने मामले मे न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। फिलहाल अभी तक पुलिस की नाकामी के चलते आरोपी आजाद घुम रहे हैं और मासूम के परिजन घुट घुट कर जिंदगी अपमानजनक जीवन जी रहे हैं। हालांकि इस मामले मे पुलिस की कई टीमे मामले के खुलासे के लिये गठित हुई थीं, लेकिन सभी के प्रयास बेनतीजा रहे। जरा सोचिये यदि किसी मन्त्री विधायक, सांसद व अधिकारी के सगे सम्बन्धी के साथ यह घटना हुई होती तो अब तक लोकसभा व विधानसभा सभा में हंगामा हो जाता।
न जाने कितने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज गिर चुकी होती। लेकिन विपन्न परिवार की मासूम बेटी के साथ बेरहमी के साथ हुऐ रेप और हत्या पर पुलिस की कई टीमें नाकारा साबित हो रही हैं। एक सामान्य परिवार के साथ हुये इस भयानक हादसे पर किसी सांसद विधायक ने आवाज नही उठाई। सच्चाई यह है कि पांच साल के उस मासूम बच्ची की चीखें आज भी परिजनों को चैन से सोने नही दे रही हैं जिन्होने न केवल अपनी बच्ची खोया है बल्कि हालात ने उनसे सिंर उठाकर जीने का हक भी छीन लिया है।
क्या इतनी गंभीर वारदात को अंजाम देने वाला सिस्टम पर भारी है। क्या सीबीआई व अन्य संस्थायें विपक्षी पार्टियों व उनके नेताओं को डराने के लिये हैं। बेहतर होता सिद्धनाथ प्रकरण का सच सामने आता जो हजारों लाखों बेटियों को इस विश्वास से भर देता कि हैवानियत करने वाला अपराध पर चाहे जितनी परदेदारी करे पुलिस उसे ढूढ़ निकालेगी और सिस्टम उसे ऐसी सजा देगा कि दूसरा कोई ऐसी घटना को अंजाम देने से पहले सौ बार सोंचने को मजबूर होता। एक दूसरी घटना जो मुण्डेरवां थाना क्षेत्र के रामपुर रेवटी मे घटी यह भी पुलिस के माथे पर कलंक है और सिस्टम की नाकामी बयां कर रहा है।
मुण्डेरवां निवासी हरिकान्त गुप्ता की 03 मई 2024 की रात में गला काटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के खुलासे की मांग को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल आईजी आरके भारद्वाज से मिलने गया था। उन्होने कहा कोई जरूरी नही कि हर घटना का खुलासा हो जाये। आप लोगों को कुछ क्लू मिले तो बताइये। सोचिये आम आदमी सिस्टम के आगे कितना लाचार है। इससे यह पता चलता है कि सिस्टम उन्ही के लिये हाइटेक है जो मुख्य धारा मे हैं या सिस्टम मे अपनी ऊची पहुंच रखते हैं। आम आदमी तो सिस्टम के सामने पहुंचकर बेचारा हो जाता है।





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