अशोक श्रीवास्तव की संपादकीय
कांवड़ मेला, अनियंत्रित भीड़ और सिस्टम की लाचारी
एक बार फिर कांवड़ मेला सामने हैं। कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा हो रही है, उनके पैर धोये जायेंगे और डरे हुये पुलिसकर्मी उनके सामने गुलाब लेकर खड़े दिखाई देंगे। यही कांवड़िये मौका मिलने पर पुलिस की ऐसी तैसी कर देते हैं, वर्दी फाड़ देते हैं यहां तक कि कई बार उन्हे पीटकर लहूलुहान कर देते हैं। ये जिन्हे अपना आदर्श मानते हैं वह एक बार भी नही कहता कि उदंडता नही करना है, शांतिपूर्वक कांवड़ लेकर जाना है और किसी के लिये मुसीबत नही बनना है। यही कारण है कि कांवड़ मेला शुरू होते ही साइड इफेक्ट भी आने लगते हैं।
आज हर जुबान पर है, सड़कें टु लेन हों, फोर लेन हों या फिर सिक्स लेन। अनियंत्रित भीड़ जब सड़क पर उतरती है तो पूरी सरकार और प्रशासन घुटनों पर आ जाता है। एक लेन टृ लेन नहीं पूरा फोर लेन बंद हो जाता है। गैर समुदाय के लोगों की बात छोड़ दीजिये समानान्तर समुदाय के लोगों की भी सड़कों पर आने की हिम्मत नही हो पाती। पूरी सड़क खाली करा ली जाती है। कोई अनुशासन नहीं, कोई कायदा कानून नहीं, नशा, उदंडता, अनुशासनहीनता, फूहड़ता, कानून की अनदेखी चरम पर पहुंच जाती है।
देखकर भी कोई कुछ नही बोल पाता। जब मुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर बैठकर लोग कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं तो मजाल किसकी, जो उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करे। अशोक की लाट वाली पुलिस की वर्दी पहनकर कोई तलवार लेकर तो कोई गदा लेकर प्रदर्शन कर रहा है। यह सिर्फ इसलिये कि प्रदेश के मुखिया की नजर मे रहें और उनके नासमझ कार्यकर्ता उनको सिर आंखों पर बैठाकर रखें। उनसे कभी टकराहट न हो। एक दौर था जब पुलिस अपनी वर्दी पर कोई दाग बर्दाश्त नही करती थी। आज तो कम्यूनल हो चुकी है। सरकार की सोच से खुद का मिलान करती है और उसी के अनुसार अपना आचरण करती है।
सविधान के मायने हाशिये पर हो गये हैं। मौजूदा सरकार और स्थानीय नेताओं को कैसे खुश रखना है यह प्राथमिकताओं मे शामिल हो चुका है। कल्पना करिये पांच दिनों तक फोरलेन कांवड़ यात्रा के नाम पर रिजर्ब कर दिया गया है। एम्बुलेंस के अलावा कोई नही आ जा सकता। परिवहन सेवायें बंद हैं, सामानों की ढुलाई प्रभावित है, बच्चों के स्कूल बंद हैं। पांच दिनों के लिये एक ऐसा ब्रेक लगा दिया जाता है कि कोई कुछ नही कर सकता, बोल भी नही सकता। जिलों मे जनसुनवाई के कार्यक्रम बंद हैं। बेबस लाचार होकर सिस्टम को कोसना जनता की मजबूरी बन जाती है। बिलकुल जैसे अघोषित इमरजेंसी।
अधिकांश जिलों मे प्रशासन ने कांवड़ियों से ट्रैक्टर ट्राली पर बैठकर आने से मना किया है। ऐसा शायद इसलिये कहा गया था कि ट्रैक्टर ट्राली से मार्ग दुर्घटनायें ज्यादा होती हैं। लेकिन यह अपील औपचारिकता मात्र बनकर रह गई। सड़कों पर जाकर देखिये, न डीजे का हार्ट बीट बढ़ाने वाला शोर कम हुआ है और न ही खतरनाक तरीके से ट्रैक्टर ट्रालियों मे बैठकर कांवड़ यात्रा पर जाना। प्रशासन भी लाचार दिखता है, कहीं थोड़ी सी चूक है तो कांवड़िये अपने तरीके से फैसला आन स्पाट करते हैं। इसके सैकड़ों उदाहरण हैं।
बगैर हेलमेट बाइक चलाने वालों पर जिस प्रकार पुलिस चालान करने के लिये टूट पड़ती है वही पुलिस तीन चार पांच जितने भी लोग बैठ पायें कांवड़ मेले मे बाइक पर बैठकर जायें उन्हे देखकर हाथ बांधे खड़ी नजर आती है। इनका चालान करने की बात बहुत दूर है, इनसे यातायात नियमों का हवाला देकर बात करने का भी साहस नही जुटा पाती है पुलिस। हर बार सवाल उठते हैं। इस बार भी प्रबुद्धजन सवाल पूछ रहे हैं, क्या सरकार जनसामान्य के आवागमन के लिये टु लेन खाली नही रख सकती, क्या कांवड़िये अनुशासित तरीके से टु लेन पर नही चल सकते।
क्या ये पुलिस, स्थानीय प्रशासन या सरकार की अपील नही मानते। कुल मिलाकर इन सवालों का जवाब ढूढ़ने पर जो बात सामने आती है वह यही है कि यह एक अनियंत्रित भीड़ होती है जिसे धर्म और आस्था के नाम पर काफी छूट मिली होती है इसलिये पूरा सिस्टम इन्हे नियंत्रित करने की बजाय इनकी जी हुजूरी मे लगा रहता है। अब सवाल ये है कि ऐसी परिस्थितियों में आम जन को क्या करना चाहिये। उनके लिये सलाह है कि खुद को सुरक्षित रखें, बेवजह कोई जोखिम न उठायें, क्योंकि जरा सी चूक अनहोनी को दावत दे सकती है क्योंकि भीड़ जब अधिक होती है तो हिंसा और उन्माद चकित करने वाला नही होता।
याद रहे
कांवड़ यात्रा शिव भक्तों की एक पवित्र और आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की जाने वाली हुड़दंग और उदंडता की घटनाओं से इसकी गरिमा और मूल भावना प्रभावित होती है। यात्रा के दौरान कुछ हुड़दंगी तत्वों द्वारा रास्तों पर जाम लगाना, जबरन वसूली, या दुकानों व वाहनों में तोड़फोड़ जैसी छिटपुट घटनाएं सामने आती हैं। नियमों की अनदेखीः तेज आवाज में डीजे, बिना साइलेंसर की मोटरसाइकिलें और अनुशासनहीनता के कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा की आड़ में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसका कितना असर है साबके सामने है।












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