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यूपी सरकार का बड़ा एक्शन, 4 हजार करोड़ के घोटाले मे PCS अफसर बर्खास्त


 

यूपी सरकार का बड़ा एक्शन, 4 हजार करोड़ के घोटाले मे PCS अफसर बर्खास्त
गौतमबुद्ध नगर संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)।
जिले के नोएडा प्राधिकरण में हजारों करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े चर्चित लीज बैक मामले में शासन ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। इस बड़े घोटाले में सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व में तैनात वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। 

यह कार्रवाई उस मामले में हुई है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण की जमीन को नियमों के विपरीत लीज बैक दिए जाने और करीब 4,000 करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली भूमि के अनियमित आवंटन से जुड़े गंभीर आरोपों से जुड़ी हैं। उल्लेखनीय है कि हरीश चंद्र नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात रह चुके हैं। जानकारी के अनुसार वह गौतमबुद्धनगर की दादरी तहसील में भी एसडीएम के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। मामला ग्राम शहदरा से जुड़ी वह जमीन है, जिसे नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित कर अपने कब्जे में लिया था। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार सेक्टर 140-ए, 141, 142 और 143 से जुड़ी लगभग 3,81,527 वर्ग मीटर भूमि के लीज बैक में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। 

जांच रिपोर्ट के अनुसार आबादी के निर्धारण के लिए सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था, लेकिन रिश्वत खोरी और भ्रष्टाचार की वजह से ऐसा नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि आबादी विनियमों के तहत पात्र स्थानीय लोगों के लिए लीज बैक की सीमा निर्धारित थी। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज आरोपों के मुताबिक अधिकतम 450 वर्ग मीटर तक की भूमि लीज के प्रावधान के बावजूद बाहरी व्यक्तियों और निजी कंपनियों के पक्ष में बड़े भूखंडों के लीज डीड कराए गए। 

कहा जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज विभागीय आरोपों के अनुसार 7 अक्टूबर 2011 को हरीश चंद्र द्वारा अधीनस्थ नायब तहसीलदार को लीज डीड निष्पादित करने का निर्देश दिया गया और उसी दिन 18 लीज डीड से संबंधित कार्रवाई हुई। इनमें निजी कंपनियों, गांव के बाहर के लोगों तथा ऐसे लोगों के मामले भी शामिल बताए गए जिन्हें नियमों के अनुसार पात्र नहीं माना गया था। सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में लगभग 4,00,447 वर्ग मीटर भूमि का उल्लेख है। शासन की कार्रवाई से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये बताया गया। 

जांच में आरोप लगाया गया कि तथ्यों को छिपाकर और भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत कर इस जमीन के लीजबैक का रास्ता तैयार किया गया। सूत्रों के अनुसार हरीश चंद्र के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। मामले की जांच मेरठ मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। बाद में यह मामला लंबे समय तक विभिन्न प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं में चलता रहा। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की सहमति भी इस मामले में महत्वपूर्ण रही। शासन के बर्खास्तगी आदेश के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने 6 जनवरी 2022 को अपनी सहमति उपलब्ध कराई थी। 

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ताजा महत्वपूर्ण न्यायिक कड़ी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का 3 सितंबर 2026 का आदेश है। हाईकोर्ट ने State of U.P. vs Harish Chandra मामले में कहा कि विभागीय कार्यवाही 2013 से लंबित थी। अदालत ने अनुशासनिक प्राधिकारी को उपलब्ध कराए गए नए दस्तावेजों पर भी विचार करने के लिए कहा और अंतिम निर्णय के लिए समय दिया। सूत्र बताते हैं कि 28 सितंबर 2026 को नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग की ओर से हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने आदेश जारी किया। उस समय हरीश चंद्र पश्चिम बंगाल के कोलकाता में उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। 

शासन के आदेश में विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में सिद्ध आरोपों, लोक सेवा आयोग की सहमति और 3 सितंबर 2026 के हाईकोर्ट आदेश में सामने आए तथ्यों को कार्रवाई का आधार बनाया गया है। करीब 4,000 करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली जमीन से जुड़े इस प्रकरण में केवल एक अधिकारी की विभागीय कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लीज बैक से लाभान्वित पक्षों, संबंधित भूमि अभिलेखों और उस समय की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच में जिन निजी कंपनियों और अन्य पक्षों का उल्लेख आया है, उनके संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायिक आदेशों में दर्ज तथ्यों को अलग-अलग देखना होगा। 

केवल किसी जांच में नाम आने को अपने आप आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जमीन के बढ़ते मूल्य को देखते हुए शहदरा लीज बैक प्रकरण एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि प्राधिकरण की अधिग्रहित जमीन के इस्तेमाल, आबादी निर्धारण और लीज बैक की प्रक्रिया में नियमों का पालन किस स्तर तक हुआ था। लोगों का कहना है कि उक्त करवाई को लेकर एक बार फिर से यह स्पष्ट होता है कि प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की जडे बहुत गहरी है। क्योंकि अभी भी नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में अवैध रूप से निर्माण कार्य बड़े पेमाने पर जारी है।

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