सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी
कुलभूषण अग्रहरि ने किया देहदान की घोषणा
बस्ती, 14 सितंबर। बस्ती के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी कुलभूषण अग्रहरि ने किया अपना देहदान करने की घोषणा की। कहते हैं कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन कर्म अमर होते हैं। इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है बस्ती के गांधी नगर, बमनगांव मोहल्ला निवासी सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी कुलभूषण अग्रहरि ने।
उन्होंने निःस्वार्थ सेवा, त्याग और परोपकार की भावना से प्रेरित होकर एक ऐसा नेक और साहसिक निर्णय लिया है जो पूरे पूर्वांचल के लिए एक मिसाल बन गया है। उन्होने आगामी ’19 सितंबर 2026, दिन शनिवार को गौरीदत्त धर्मशाला बस्ती में भव्य समारोह के बीच महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, रामपुर बस्ती को अपना देहदान करने का संकल्प लेंगे। इस ऐतिहासिक और पुनीत कार्य के लिए महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में एक सहमति पत्र पर कुलभूषण अग्रहरि ने हस्ताक्षर किया।
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार, डॉ अनिल कुमार यादव उप प्रधानाचार्य एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञान मिश्रा एवं जन उत्थान चौरिटेबल ट्रस्ट बस्ती के निदेशक अंशुल पटेल के बीच विधिवत सहमति बनी। सहमति के अनुसार कुलभूषण अग्रहरि के सम्मान में जन-जागरण हेतु मेडिकल कॉलेज बस्ती और कैली अस्पताल में उनका फोटो लगाया जाएगा जिस पर नाम, पता, देहदान की और मृत्यु की तिथि अंकित होगी।
उनकी याद में मेडिकल कॉलेज और कैली अस्पताल परिसर में दो-दो छायादार वृक्ष जैसे नीम, पीपल, अर्जुन लगाकर उस पर भी नाम पट्टिका लगाई जाएगी। मानवता का सम्मान करते हुए उनके मृत शरीर से उनके नाखून व बाल उनके इकलौते पुत्र कुलदीप को पंचतत्व में विलीन करने के लिए दिए जाएंगे। सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह होगा जब कुलभूषण अग्रहरि के पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान से मेडिकल कॉलेज तक फूल मालाओं से सजे खुले वाहन में बैंड बाजे के साथ पुष्प वर्षा करते हुए जुलूस के रूप में ससम्मान ले जाया जाएगा।
जुलूस में देहदान प्रेरणा से संबंधित बैनर लगे होंगे और ऑटो लाउडस्पीकर से नारे गूंजेंगे। आज पूरे देश में मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्रों के लिए कैडेवर (मानव शव) की भारी कमी है। बिना कैडेवर के डॉक्टर मानव शरीर की संरचना नहीं समझ सकते और अधूरा ज्ञान लेकर समाज में जाते हैं। कुलभूषण अग्रहरि का यह दान सीधे तौर पर भारत के मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रों को नया अनुसंधान और अविष्कार करने में मदद करेगा जिससे भारत का नाम विश्व में रोशन होगा और देशभक्त डॉक्टर बनेंगे। मृत शरीर का उपयोग समाप्त हो जाने के बाद मेडिकल कॉलेज उसे उनके पुत्र को पंचतत्व में विलीन करने हेतु दे देगा अथवा विशेष परिस्थितियों में स्वयं विलीन कर देगा।



Post a Comment
0 Comments