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नोयडा पुलिस के हत्थे चढ़े गांजा तस्कर, 4 करोड़ का गांजा बरामद, ‘मामा’ कोड का इस्तेमाल कर करते थे तस्करी

नोयडा पुलिस के हत्थे चढ़े गांजा तस्कर, 4 करोड़ का गांजा बरामद, ‘मामा’ कोड का इस्तेमाल कर करते थे तस्करी




यूपी डेस्कः नोएडा में थाना सेक्टर 58 की पुलिस व स्वाट टीम ने 3 गांजा तस्करों के पास से 8 कुन्तल गांजा बरामद किया गया है जिसकी कीमत करीब 4 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। ये गांजा 16 बोरियों में भरा गया था। इसके अलावा 2 हजार लीटर पेस्टिसाइड्स भी बरामद किया गया। जिसकी कीमत करीब 60 लाख रुपए आंकी जा रही है। गिरफ्तार किए गए तस्करों की पहचान सुदामा, अनीश और प्रवीण के रूप में हुई है। सुदामा गैंग का सरगना है। ये आरा बिहार का रहने वाला है। गांव में रेत निकालकर बेचने का काम करता है। दो साल से गांजे की तस्करी में लिप्त है।


अनीस हरियाणा का रहने वाला है। ट्रक चलाने का काम करता है। प्रवीण पासवान आरा बिहार का रहने वाला है खलासी के साथ चालक भी है। डीसीपी विद्या सागर मिश्र ने बताया कि सुदामा पहले भी इसी तरह के अपराध में जेल जा चुका है। वो दो महीने पहले ही जेल छूटा है। जेल से छूटने के बाद बिहार गया और दूसरा संगठन बनाकर फिर से गांजा तस्करी करने लगा। इस बार ये पेस्टिसाइड्स जैसी दवाओं को ढोने वाली गाड़ियों के जरिए गांजा छिपाकर जगह-जगह सप्लाई करता है। 


इससे जल्दी से कोई पकड़ नहीं पाता है। पूछताछ में सुदामा ने बताया कि ये गांजा आंध्र प्रदेश और उड़ीसा से लाया जाता है। इसकी मादकता को बढ़ाने के लिए इसे कई महीनों तक सुखाकर दबाकर चिप्पड़ के रूप में विकसित करने के बाद बाजार में बेचने के लिए लाया जाता है। इस तरह के गांजा की मांग बहुत ज्यादा है। इसी कारण बाजार में इसकी कीमत 40 हजार रुपए किलो है। सुदामा ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जेल जाने के बाद इसने पुराने गैंग से नाता तोड़ दिया उनके साथ काम करना बंद कर दिया। 


क्योंकि इनको यह आशंका होता है कि गैंग के सदस्यों के द्वारा इनकी मुखबिरी हो सकती है। इसलिए जेल से निकलने पर इसने अपना नया गैंग बनाया। जिस ट्रक से मॉल जाता था। उसके एक किलोमीटर आगे एक कार चलती थी। जिसमें बैठे लोग 1 किलोमीटर तक की पूरी जानकारी ट्रक में बैठे अपने आदमी को देते थे। ये लोग हमेशा वाट्सऐप कालिंग करते थे। ताकि फोन कॉल को ट्रैक न किया जा सके। पुलिस की जानकारी मिलते ही ये लोग कोड मामा का प्रयोग करते थे। जिससे ट्रक ड्राइवर समझ जाता था और एक किलोमीटर पहले ही ट्रक को झाड़ियों या लिंक रोड पर खड़ा कर खराब होने का बहाना बनाकर उसके नीचे लेट जाते थे।


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