चिल्ड वाटर पीने की आदत छोड़ दीजिये- Give up the habit of drinking chilled water
जरा सी प्यास लगी और फ्रिज से ठंडे पानी की बोतल निकालकर गला तर कर लिया। असल में इससे गर्मी में तप रहे शरीर को तो राहत मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इससे आपके शरीर को कितना नुकसान हो रहा है? आयुर्वेद में तो ठंडा पानी पीने की मनाही है। आयुर्वेद के मुताबिक ठंडा पानी शरीर में असंतुलन और विकार पैदा कर सकता है। यह पाचन तंत्र को धीमा कर सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में 2012 में पब्लिश एक स्टडी बताती है कि ठंडा पानी पीने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। क्योंकि हमारे शरीर का नॉर्मल टेंपरेचर 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है। बस्ती जनपद मुख्यालय पर स्थित मेडिको हॉस्पिटल के चिकित्सक डा. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि अगर हम ठंडा पानी पीते हैं तो भोजन को पचाने के लिए शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
चिल्ड वाटर पीने के कई और भी नुकसान हैं। आइये विस्तार से जानते हैं। ठंडा पानी पीने से हार्ट रेट कम होने का जोखिम रहता है. और हार्ट रेट कम हो जाती है. इससे हार्ट डिजीज हो सकती है। ठंडा पानी पीने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है। ठंडा पानी पीने के बाद खाना शरीर से गुजरते समय काफी सख्त हो जाता है. इससे आंतें सिकुड़ जाती हैं और एसिडिटी की समस्या होने लगती है।
खाना पचने में परेशानी हो सकती है और कब्ज के साथ-साथ पेट दर्द, जी मिचलाना, पेट फूलना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। अधिक ठंडा पानी पीने से ब्रेन फ्रीज हो सकता है. ठंडा पानी रीढ़ की कई संवेदनशील नसों को ठंडा करता है, जहां से तुरंत ही मस्तिष्क को मैसेज भेजा जाता है, जिसकी वजह से सिरदर्द होने लगता है. इससे साइनस होने का जोखिम भी रहता है। ज्यादा मात्रा में ठंडा पानी पीने से शरीर के फैट बर्न नहीं हो पाते हैं और फैट सख्त बनता जाता है. जिससे वजन बढ़ सकता है। इसलिए अगर आप मोटापे की समस्या से बचना चाहते हैं तो ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। content writer Ashok Srivasta













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