नेताओं ने बोलना बंद कर दिया, अफसरों ने सुनना और जनता ने सहन करना सीख लिया, बेड़ा गर्क हो रहा व्यवस्था का
बस्ती, 24 जून। बड़ेवन से लेकर कम्पनी बाग तक करीब डेढ़ किमी सड़क के चौड़ीकरण को लेकर ठेकेदार और स्थानीय प्रशासन ने महीनों से दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों को परेशान कर रखा है। इस कार्य की लागत क्या है, कौन सी संस्था इसे करवा रही है या फिर कितने कितने दिनों में चौड़ीकरण कार्य पूरा हो जायेगा कुछ नही मालूम।
अव्यवस्था, दूरदर्शिता और मनमानेपन का ये आलम है कि डेढ़ किमी. सड़क में आये दर्जनों पेड़ों को धराशायी कर इलाके की हरियाली आनन फानन में नष्ट कर दी गई। इसके बदले कहीं पेड़ लगाये गये या लगाये जायेंगे कुछ नही मालूम। शहर के समाजसेवियों और सम्भ्रान्त नागरिकों को सांप सूंघ गया। कार्य इतना कच्छप गति से चल रहा है कि साल भीतर इसके पूरा होने की उम्मीद नही है। कार्य करने का अंदाज जो है उसे जानकार आप हैरान हो जायेंगे। चार दिनों से आवास विकास, फौव्वारा तिराहा, कम्पनी बाग की विद्युत आपूर्ति को पूर्व सूचना देकर 11 बजे दिन से 4 बजे तक बाधित कर दिया जाता है लेकिन आपूर्ति 8 बजे रात तक भी बहाल नही हो पाती।
वी मार्ट के सामने, गांधी कला भवन के सामने विशालकाय पेड़ों को काटकर सड़क पर गिरा दिया गया। यह शहर का मुख्य और अति व्यस्ततम मार्ग है फिर भी इस पर आवागमन बहाल कराने की व्यवस्था निहायत ढीली थी। 24 घण्टे तक आवागमन बाधित रहा, किसी तरह दूसरे दिन सड़क से डालियां हटाई गयीं लेकिन मलबा अभी भी पटरियों पर पड़ा है। आप जान सकते हैं आजकल सबकुछ हाई टेक्नालोजी से हो रहा है। पेड़ काटकर गिराये जाने के दूसरे दिन JCBऔर कटर आया। धीरे धीरे रास्ता खाली कराया गया। विद्युत व्यवस्था बहाल की गई तो किसी के यहां बिजली आई किसी के नही आई। अनेकों कम्प्लेन अमहट सब स्टेशन पर दर्ज है लेकिन निस्तारण करने वाला कोई नही है।
आरामखोर अफसर पहले तो फोन नही उठाते और उठाते हैं तो कुछ भी आश्वासन दे देते हैं जिसमे कोई गंभीरता नही दिखाई देती। इसी इलाके में Media Dustak New का कार्यालय भी है। रविवार से ही कार्यालय में बिजली नही आ रही है। जेई के मो.न. 9453047444 पर पूरे दिन फोन करते रहे, बस वे रटा रटाया आश्वासन दे देते, एक डेढ़ घण्टे में सही हो जायेगा। यह कहते कहते शाम हो गई। कई बार अफसर नही सुनते तो छोटे कर्मचारियों से मदद मिल जाती है। लाइनमैन के 9451610477 न. पर बात की गई, उन्होने कहा सब स्टेशन जाइये कम्प्लेन दर्ज कराइये तब बनेगा। सब स्टेशन गये, करीब 4 बजे कम्प्लेन दर्ज कराया। कहा गया एक डेढ़ घण्टा इंतजार करिये, 5 घण्टा इंतजार किया कोई नही आया।
जो जेई दिन भर आश्वासन की घुट्टी पिलाते रहे उन्होने शाम होने के बाद फोन आउट आफ कवरेज कर दिया। फिर सब स्टेशन गये, अपने कम्प्लेन का स्टेटस पूछा। वहां तैनात एक थका हुआ आदमी जिसका नाम सुशील था, जवाब देने की स्थिति में नही था। 20 मिनट तक खड़ा रहने के बाद वह हमे दो मिनट मुश्किल से सुन पाया। वह फोन पर बिजी रहा। उसके दो मोबाइलों पर बार बार फोन आते रहे। किसी ने कहा एक्सईएन से बात करिये उनके मो. न. 9450963800 पर काल किया उन्होने फोन नही रिसीव किया। सब स्टेशन पर सहायक अधि.अभियन्ता का नम्बर 8004924947 दीवाल पर लिखा था, यह नम्बर नीति मिश्रा का बताया गया। उन्होने बड़े सलीके से बात किया, किसके नाम से कम्प्लेन है नोट किया कहा अभी देखवाते हैं।
फिलहाल वह भी रात 9.30 तक नही देखवा पाईं। जिससे भी कम्प्लेन की गई बताया गया मीडिया का दफ्तर है, खबरों का संपादन नही हो पा रहा है। जबकि अगल बगल सभी घरों में बिजली की आपूर्ति हो रही है। दुर्भाग्य है अफसरों ने सुनना बंद कर दिया है, नेताओं ने बोलना बंद कर दिया है और जनता ने सहन करना सीख लिया है इसलिये पूरी व्यवस्था का बेड़ा गर्क हो रहा है। जनता के बुनियादी सुविधाओं का किसी को ख्याल नही है। प्रेस के दफ्तर में 24 घण्टे से बिजली नही है, सोचिये क्या जिलाधिकारी आवास पर 24 घण्टे बिजली न रहे तो काम चल जायेगा ? वे तो इतने देर में सिर पर आसमान उठा लेंगे। अधिशासी अभियन्ता, या अवर अभियन्ता कितनी देर बगैर बिजली के रहते हैं ? या फिर कितनी देर रह सकते हैं। जिलाधिकारी के हाथ में पूरी व्यवस्था है उन्हे व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखनी चाहिये। लोग चाहे जैसे कार्य कर रहे हैं कोई चार्टर नही बना है। अफसर जनता को जितना चाहे परेशान कर सकते हैं, कर रहे हैं। एक बड़ा सवाल है अफसरों की जवाबदेही आखिर कौन तय करेगा ?














Post a Comment
0 Comments