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बस्ती शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त, न टैक्सी स्टैण्ड, न पार्किंग जोन, अतिक्रमण से हाफ रहा शहर

बस्ती शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त, न टैक्सी स्टैण्ड, न पार्किंग जोन, अतिक्रमण से हाफ रहा शहर 
The transport system of Basti city is destroyed, there is no taxi stand, no parking zone, the city is half due to encroachment.



बस्ती, 28 अक्टूबर।
शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। न टैक्सी स्टैण्ड का पता है और न पार्किंग जोन मार्क किये गये हैं। इसलिये जनता भी आजाद है जब और जहां चाहा गाडी़ पार्क कर दिया, चाहे जहां सवारी बैठा लिया और चाहे जहां उतार दिया। अतिक्रमण से पूरा शहर हांफ रहा है। सब कुछ रामभरोसे। दुर्गापूजा मेले में एम्बुलेंस को भी जूझना पड़ा था। बाकी यात्रियों को रोजाना दो चार बार जाम में फंसना पड़ता है। स्कूली बच्चे हों या माल वाहक या सवारी गाड़ियां सभी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

चालान करने में बिजी रहते हैं यातायात सिपाही
ट्राफिक सेंस खोते जा रहे लोग
बड़े प्यापारियों ने नीलाम कर दी सड़क की पटरियां
अतिक्रमण देख नजरअंदाज कर रहे जिम्मेदार
अतिक्रमण से मुक्त नही बस्ती का कोई चौराहा

बड़ेवन, कचहरी, शास्त्री चौक, सुबाष तिराहा, काली मंदिर, रौता चौराहा, नेहरू तिराहा, भगत सिंह तिराहा, संत गाडगे तिराहा, दक्षिण दरवाजा, पुरानी बस्ती, अस्पताल चौराहा, कम्पनी आग, गांधीनगर कोई भी स्थान अतिक्रमण से मुक्त नही है। आलम ये है कि बड़े व्यापारियां ने अपनी दुकानों के सामने पटरियों को भी नीलाम कर दिया है। 200 से 500 रूपये रोजाना लेकर पटरियों पर ठेले लगवाये जा रहे हैं। शहर में 10 हजार के आसपास थ्री ह्वीलर हैं। ये बिलकुल आजाद हैं। आप चाहे जितना अच्छा गाड़ी चलाते हों, ये आपके आसपास आ जायें तो कोई ज्ञान काम नही आता। 


ये ऐसे रोकेंगे कि खुद नही जानते कहां रोक रहे हैं। सवारी देखा नही कि ब्रेक लगा दिया, तत्काल वाहन रोकने का साइड इफेक्ट भी कई बार देखने को मिलता है। चौराहों पर खड़े होकर डियूटी कर रहे यातायात सिपाही को इससे बिलकुल मतलब नही रहता कि कौन रफ ड्राइव कर रहा है। इस सरकार में यातायात सिपाही सिपाही कम फोटोग्राफर ज्यादा हो गये हैं। वाहन चालक के चेहरे का भाव और स्टेटस देखते ही भांप जाते हैं, मोबाइल लेकर सामने ही खड़े हो जाते हैं। इनको महीने भर के लिये आजाद कर दिया तो शहर की सभी गाड़ियों का चालान हो जायेगा। 


आजकल बुलेट से आवाज निकालने का फैशन फिर से चल पड़ा है। यातायात सिपाहियों के सामने से ऐसी बुलेट निकलती है लेकिन वे उन्हे रोकने की हिम्मत नही करते। गांधीनगर के अलावा अब मालवीय रोड भी अतिक्रमण की चपेट मे है। शहर के गांधीनगर में दबाव बढ़ा तो ब्लाक रोड, मालवीय रोड पर विस्तार होने लगा। रौता चौकी के सामने ही प्रज्ञा पूजा भण्डार सहित कई दुकानों के सामने सड़क पर वाहन खड़े होते हैं लेकिन ये किसी की नजर में नही आता, या फिर जान बूझकर नजरअंदाज किया जाता है। समाचार के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों व जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराना है कि अतिक्रमण और जाम की समस्या सिर से ऊपर चली जाये इससे पहले शहरवासियों को इससे निजात दिलाने के ठोस उपाय करने होंगे। फोटो प्रज्ञा पूजा भण्डार के सामने की।

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