नोयडा में 100 करोड़ की जमीन खरीदकर चर्चा में आया चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
Class IV employee came into news after buying land worth Rs 100 crore in Noida
राज्य संवाददाता, दिल्ली (ओ पी श्रीवास्तव)। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में स्थित नोएडा प्राधिकरण के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) ने कई सौ करोड़ कीमत की 100 बीघा जमीन खरीदी है जो आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई विधिक कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन बताया जा रहा है कि शीघ्र ही प्राधिकरण कार्यवाही कर सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्राधिकरण के एक चपरासी और दो प्रबंधक स्तर के अधिकारियों ने आनंदपुर गांव में 100 बीघा जमीन सस्ते दामों पर खरीदा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह चपरासी, जो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के इंडस्ट्री विभाग में तैनात है, अपनी सरकारी नौकरी का फायदा उठाकर इस खेल में कई वर्षों से लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और कॉलोनाइजर्स के साथ मिलकर नई बस्ती और बहरामपुर गांवों में अवैध कॉलोनी काटने का काम शुरू किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि कॉलोनाइजर्स ने ग्रामीणों से जमीनें खरीदकर उन पर बाउंड्रीवाल और कमरे बनवाने का सिलसिला तेज कर दिया है, ताकि इन जमीनों को पुरानी आबादी दिखाकर प्राधिकरण के नियमों को दरकिनार किया जा सके। अवैध भवन और वेयरहाउस का निर्माण न्यू नोएडा में बड़े पैमाने पर हो रहा है। जानकारों का कहना है कि दर्जनों गांवों में खेतों में बाउंड्रीवाल खड़ी हो रही है, और हर दिन हजारों मजदूर इन निर्माण कार्यों में जुटे हुए हैं। यह स्थिति नोएडा के मास्टर प्लान को गंभीर रूप से प्रभावित कर नोएडा के उद्देश्य व स्वरुप को विफल कर सकती है।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि यदि यह अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं, तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तरह यहां भी किसान आंदोलन शुरू हो सकते हैं। इस संबंध में जानकारो का कहना है कि जमीन की इस अनियंत्रित खरीद-फरोख्त के चलते भविष्य में प्राधिकरण के लिए विकास हेतु जमीन अधिग्रहण करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे न्यू नोएडा का विकास रुक जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यू नोएडा में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो यह इलाका बसने से पहले ही अराजकता का केंद्र बन जाएगा। लोगों ने कहा है कि प्राधिकरण और जिला प्रशासन को इस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि नोएडा को एक व्यवस्थित और विकसित शहर बनाने की योजना सफल हो सके।
उक्त सबंध में रजिस्ट्री विभाग के एक उप निबंधक ने अपना नाम प्रकाशित नही किए जाने की शर्त पर कहा कि हमें तो स्टाम्प ड्यूटी से मतलब है। वह जमीन कहां की है, किसकी है, इस संबंध में हम लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और ना ही हम लोगों के पास इतना समय है। उस अधिकारी ने कहा कि सरकार को राजस्व चाहिए। राजस्व के लिए हमारे ऊपर दबाव रहता है, इसलिए हम क्रेता और विक्रेता के बारे में जानकारी करना उचित नहीं समझते हैं। केवल यह देखते हैं कि सर्किल रेट के अनुरूप स्टांप जमा हो रहा है अथवा नहीं। यह कहने पर कि रजिस्ट्री विभाग की लापरवाही की वजह से जमीन व सम्पत्ति संबंधी विवाद उत्पन्न हो रहें हैं। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में हम कोई जवाब नहीं देंगे क्योंकि यह लखनऊ में बैठी सरकार की जिम्मेदारी है।













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