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जयंती पर याद आई महाराणा प्रताप का शौर्य गाथा

जयंती पर याद आई महाराणा प्रताप का शौर्य गाथा
बस्ती, 09 मई।
ऐसे समय में जबकि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के बादल छाये हुये हैं शुक्रवार को देश के महान सपूत महाराणा प्रताप को उनकी 485 वीं जयंती पर याद किया गया। पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णचन्द्र सिंह के संयोजन में शुक्रवार को सिविल लाइन्स तिराहा स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर सांसद जगदम्बिका पाल के साथ ही अनेक वरिष्ठ नेताओं ने माल्यार्पण किया।


माल्यार्पण के बाद पं. अटल बिहारी बाजपेई प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये  सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि पहलगाम की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमितशाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ ही पूरे सरकार ने इसे प्रतिष्ठा से लिया और आपरेशन सिन्दूर से पाकिस्तान थर-थर काप रहा है। यह प्रेरणा हमें महाराणा प्रताप, राणा सांगा जैसे अनेक वीर सपूतों से मिली है। उन्ही की ताकत से आज भारत दुनियां में प्रतिष्ठित है। हमें अपने उन महापुरूषों को सदैव याद रखना होगा जिन्होने देश की अस्मिता के लिये सर्वस्व बलिदान कर दिया।


पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने कहा कि जब भी भारतीय इतिहास में वीरों का नाम याद किया जाता है, महाराणा प्रताप का नाम सबसे आगे है। उनकी जयन्ती हम सब के लिये प्रेरणा है। विधायक अजय सिंह, एम.एल.सी. देवेन्द्र प्रताप सिंह, गोसेवा उपाध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री महेश शुक्ल, भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र, पवन कसौधन, ऐश्वर्यराज सिंह,  राना दिनेश प्रताप सिंह, अखिलेश सिंह, हरीश सिंह आदि ने कहा कि प्रत्येक युग में समय- काल के अनुरूप नायक पैदा होते रहते हैं। देश के निर्माण में अनेक महापुरूषों का योगदान है। हमें महापुरूषों से प्रेरणा लेकर उनके सपनों के अनुकूल भारत निर्माण का संकल्प साकार करना होगा। 


युवा पीढी महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लें। बनकटी नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि और कार्यक्रम के उप संयोजक अरविन्द पाल, महेश चन्द्र सिंह, रघुनाथ सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, गोपेश पाल आदि ने कहा कि महापुरूष संघर्ष की कोख से ही पैदा होते है। अपने महापुरूषों के बल पर भारत पुनः विजेता बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम संयोजक भाजपा नेता कृष्णचन्द्र सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप बहुत ही स्वाभिमानी प्रवृत्ति के नायक थे। जब राणा प्रताप को अपने वश में करने के अकबर के सभी प्रयास विफल रहे तब हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध हुआ। आज फिर जब देश युद्ध के मुहाने पर है तो हमें महाराणा प्रताप के संघर्षो से प्रेरणा लेनी होगी। 


गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुये एपीएन पी.जी. कालेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अमन प्रताप सिंह ने कहा कि  महाराणा प्रताप ने पूरी सजगता और अप्रतिम वीरता के साथ युद्ध लड़ा। इस युद्ध में महाराणा का प्रिय चेतक बलिदान हो गया। उनका संघर्ष और योगदान युगों तक याद किया जायेगा। अशोक सिंह ‘कटरूआ’ यशकान्त सिंह, ने कहा कि महाराणा प्रताप का पूरा जीवन संघर्षो से घिरा रहा किन्तु वे अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुये। संचालन करते हुये प्रधानाचार्य योगेश शुक्ल ने महाराणा प्रताप के इतिहास और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।


कार्यक्रम में मुख्य रूप से धु्रवचन्द्र सिंह, संजय सिंह, आसमान सिंह, सन्तोष पाल, जर्नादन सिंह, श्याम चन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, के.के. सिंह, गोपाल यादव, चन्द्रकेश सिंह ‘मनोज’ अर्जुन चौधरी, प्रियांशु सिंह, अंकित मिश्र, प्रियांशु सिंह, राहुल चौधरी, पंकज सिंह,  शक्ति सिंह, नीरज सिंह, सौरभ सिंह, शिवम सिंह, राज पाण्डेय, विशाल चौधरी, बीर बहादुर सिंह, विपुल सिंह, महन्त पाल, लक्की पाल, पवन सिंह, आशीष कुमार सिंह, रणंजय सिंह, विजय मिश्र, महेश यादव, शिव मोहन सिंह के साथ ही अनेक लोग उपस्थित रहे। पंकज गोस्वामी और साथियों ने गीतों के माध्यम से महाराणा प्रताप की स्मृतियों को जीवन्त किया।

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