एक तरह से बिल्डरों के आगे कानून लाचार हो गया है। बताया जाता है कि कुछ बिल्डरों ने प्राधिकरण की अधिसूचित क्षेत्र पर अवैध तरीके से पांच पांच मंजिला बिल्डिंग बनाकर फ्लैटों को सीधे-साधे भोले भाले लोगों को अपने जाल में फंसा कर उन्हें बेच दिया है। नोएडा प्राधिकरण की तरफ से ऐसे बिल्डिंग के बिल्डरों के खिलाफ नोटिस दी जाती है तो बिल्डरों में थोड़ी देर के लिए हलचल सी मच जाती है और कई दबंग किस्म के बिल्डर नोटिस को ही उखाड़ देते है।
ऐसा ही एक मामला पिछले सप्ताह नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 121 में देखने को मिला। बताया गया कि गढ़ी चौखंडी गोल चक्कर से एफ एन जी रोड एवं पुस्ता रोड के बीच में स्थित भूमि को प्राधिकरण ने ग्रीन बेल्ट एरिया घोषित कर रखा है। सूत्रों के अनुसार तरून कुमार सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह नामक बिल्डर ने खसरा संख्या 36 म पर जो प्राधिकरण द्वारा ग्रीन बेल्ट एरिया घोषित है में अवैध धन अर्जित करने के उद्देश्य से नियम विरुद्ध तरीके से प्राधिकरण की अनुमति के बिना पांच मंजिल मकान “ गायत्री वाटिका सोसायटी “ में तीन दर्जन फ्लैट बना लिया तथा उसे सीधे साधे ग्राहकों को बेच भी दिया है।
सूत्रों के अनुसार इस निर्मित मकान पर पिछले दिनों प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया तो मकान स्वामियों के अंदर तथा खरीदारों के बीच में हड़कंप व घबराहट सी फैल गई है। कहा जाता है कि सोसायटी के करीब बींस लोगों ने बीते 17 मई 25 को जिला अधिकारी एवं पुलिस आयुक्त को संयुक्त हस्ताक्षरित शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन साढ़े तीन माह बीतने के बाद भी बिल्डर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच सम्बंधित बिल्डर ने अनेक शिकायत कर्ताओं को डरा धमकाकर खुद के पक्ष में एक पत्र लिखवा लिया है।
विभाग के भरोसे मद सूत्र बताते हैं कि बिल्डर ने धन बल का प्रयोग कर शिकायती पत्र को जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन में ठंढे बस्ते में दबवा दिया है। सूत्र बताते हैं कि दबंग किस्म का यह बिल्डर प्राधिकरण की नोटिस को चस्पा होते ही उखाड़ फेंकता है एवं विरोध करने वाले को विभिन्न प्रकार की खतरनाक धमकियां भी देता है। इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण के ओ एस डी महेंद्र प्रसाद आई ए एस ने बताया कि उपरोक्त खसरा संख्या 36 म प्राधिकरण की ग्रीन बेल्ट एरिया घोषित है। इसमें जो निर्माण कार्य किया गया है वह पूरी तरह से गैर कानूनी है और अब बिल्डर तथा बिल्डिंग के खिलाफ सीलिंग की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नोटिस की कार्यवाही में किसी कर्मचारी ने लापरवाही की है तो जांच करा कर जो भी दोषी होगा उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।












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