कलवारी, रामपुर तटबंध पर डैंपनर निर्माण
कार्य पूर्ण, कई गावों को मिलेगी बाढ़ व कटान से राहत
बस्ती, 8 मई। घाघरा सरयू नदी के बढ़ते कटान और बाढ़ के खतरे से तटीय गांवों को सुरक्षित करने की दिशा में सिंचाई विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सदर तहसील क्षेत्र में कलवारी, रामपुर तटबंध पर निर्माण कार्य पूर्ण होने से अब नदी किनारे बसे गांवों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। करीब 24.44 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए इस कार्य ने तटबंध की मजबूती बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीणों के मन में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत किया है।
घाघरा सरयू नदी के बाएं तट पर स्थित कलवारीदृरामपुर तटबंध लंबे समय से कटान की चुनौती झेल रहा था। बरसात के मौसम में तेज धारा के कारण तटबंध पर दबाव बढ़ जाता था, जिससे आसपास के गांवों में भय का माहौल बना रहता था। इसी खतरे को देखते हुए शासन स्तर पर विशेष परियोजना तैयार की गई, जिसके तहत तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर सुरक्षात्मक निर्माण कार्य कराए गए। परियोजना के अंतर्गत तटबंध के किमी 9.000 पर स्थित स्पर के डाउन स्ट्रीम में 600 मीटर लंबाई में ग्राम महुआपार कला मदरहवा की सुरक्षा के लिए 11 डैंपनरों का निर्माण कराया गया।
वहीं किमी 10.200 पर बने दूसरे स्पर के डाउन स्ट्रीम में ग्राम बैराडी एहतमाली मईपुर की सुरक्षा के लिए 12 डैंपनर स्थापित किए गए। इस प्रकार कुल 23 डैंपनरों के निर्माण से नदी की धारा को नियंत्रित करने और कटान रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार डैंपनर नदी की तेज धारा की गति को कम करने का कार्य करते हैं। इससे पानी का सीधा दबाव तटबंध पर नहीं पड़ता और मिट्टी का कटाव रुकता है। यही कारण है कि बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं में डैंपनर को बेहद प्रभावी तकनीक माना जाता है। इस निर्माण के पूरा होने से अब बरसात के मौसम में तटबंध की सुरक्षा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस कार्य को राहत देने वाला कदम बताया है। वर्षों से कटान की समस्या झेल रहे लोगों का कहना है कि हर मानसून में घर और खेती बचाने की चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब उन्हें काफी भरोसा मिला है कि गांव सुरक्षित रहेंगे। किसानों को भी उम्मीद है कि खेतों के कटान पर रोक लगेगी और कृषि गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक परियोजना को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूरा कराया गया है। निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीकों और मजबूत सामग्रियों का उपयोग किया गया ताकि तटबंध लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
विभाग की ओर से मानसून से पहले सभी संवेदनशील तटबंधों की निगरानी और मरम्मत का अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रदेश सरकार लगातार बाढ़ और कटान प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपायों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में कलवारीदृरामपुर तटबंध परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीण आबादी सुरक्षित होगी, बल्कि सड़क, कृषि भूमि और स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी संरक्षण मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इसी प्रकार तटीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षा कार्य जारी रहे तो घाघरा नदी के किनारे बसे गांवों को लंबे समय के लिए सुरक्षित किया जा सकता है। फिलहाल डैंपनर निर्माण पूरा होने से क्षेत्र के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है और आगामी मानसून को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।











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