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चमोली में कुदरत का कहर, कई परिवार तबाह, मां की छाती से चिपके मिले मासूमों के शव



चमोली में कुदरत का कहर, कई परिवार तबाह, मां की छाती से चिपके मिले मासूमों के शव 
Natural disaster wreaks havoc in Chamoli, devastating many families; bodies of innocent children found clinging to their mothers' chests
उत्तराखंड डेस्कः चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। मलबे के नीचे से एक मां और उसके दो जुड़वां बच्चों के शव मिले हैं। दोनों मासूम अपनी मां की छाती से लिपटे हुए थे। यह दृश्य देख लोगों की रूह कांप गई और आंखें भर आईं। 17 सितंबर की रात नंदानगर में तेज बारिश और बादल फटने की घटना हुई थी।


कई मकान जमींदोज हो गए, सड़कों का संपर्क टूट गया, लोग मलबे में दब गए। कुंतरी गांव सें 8 लोग लापता हो गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन ने तुरंत युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। 18 सितंबर को राहत टीम को एक बड़ी सफलता तब मिली जब कुंवर सिंह को मलबे से जीवित बाहर निकाल लिया गया। लगभग 16 घंटे तक वह मलबे के नीचे दबे रहे। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। 19 सितंबर को रेस्क्यू टीम ने मलबे से 38 वर्षीय कांता देवी और उनके दो जुड़वां बेटों विशाल और विकास (उम्रः 10 साल) के शव बरामद किए। 


तीनों एक ही स्थान पर मृत मिले, जहां मां ने अपने दोनों बेटों को सीने से चिपका रखा था। यह दृश्य इतना भावुक करने वाला था, रेस्क्यू टीम के सदस्य भी फफक कर रो पड़े। रेस्क्यू कर्मियों ने बताया कि यह दृश्य उनकी अब तक की सेवा में सबसे भावुक और झकझोर देने वाला था। कांता देवी के पति कुंवर सिंह, जो खुद भी मलबे से किसी तरह जिंदा बाहर निकाले गए, अब पूरी तरह टूट चुके हैं। उनकी आंखों के सामने उनका पूरा परिवार खत्म हो गया। 10 वर्षीय विशाल और विकास, सरस्वती शिशु मंदिर, नंदानगर में 5वीं कक्षा के छात्र थे और गांव में अपनी पढ़ाई और व्यवहार को लेकर बेहद प्यारे माने जाते थे।


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