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जर्नलिस्ट प्रेस क्लब सभागार में हुआ हरीश पाल की कृति 'संकल्प' का विमोचन



जर्नलिस्ट प्रेस क्लब सभागार में हुआ हरीश पाल की कृति 'संकल्प' का विमोचन
Harish Pal's work 'Sankalp' was released in the Journalist Press Club auditorium.

गोरखपुर, उ.प्र.। जो थोड़ी बहुत कविताएं भी लिखता है, वह अंततः कवि ही होता है, भले ही वह आजीवन पत्रकारिता से जुड़ा रहा हो। कुछ ऐसी जीवन गाथा है वरष्ठ पत्रकार हरीश पाल की। वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हरीश पाल खूबसूरत दुनिया का सपना देखने वाले और अन्यायी सत्ता को चुनौती देने वाले कवि हैं। उन्होंने समय को काफी गहराई से परखा, समझा और काफी गंभीरता से बड़े ही सहज भाव से इसे कविताओं में पिरोया, जिसमें अपने समय की जनविरोधी सत्ता के प्रति प्रतिरोध साफ-साफ झलकता है।


यह विचार गोरखपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चित्तरंजन मिश्र के हैं। वे जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के सभागार में वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हरीश पाल की कृति ‘संकल्प’ के लोकार्पण के बाद उनकी कविताओं पर बातचीत के क्रम में उप​स्थित साहित्यसेवकों को संबो​धित कर रहे थे। प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविवि. हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनंत मिश्र और संचालन युवा कवि नि​खिल पांडेय ने किया। लोकार्पण के उपरान्त वरिष्ठ कवि, गीतकार ने हरीश पाल के व्यक्तित्व के बारे में सबको परिचित कराते हुए अति​थियों और कार्यक्रम में उप​स्थित शहर के रचनाकारों -पत्रकारों का स्वागत किया। 


इसके उपरान्त लोकार्पित कृति में शामिल कविताओं पर बातचीत की शुरुआत डॉ. रंजना जायसवाल ने की। उन्होंने कहा कि हरीश पाल की कविताएं बहुत ही अनूठी हैं। प्रगतिशील लेखक संघ, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रघुवंश म​णि ने कहा कि हरीश पाल ने अपनी रचनाओं में प्रतीकों का जमकर इस्तेमाल किया है, जिन्हें रेखांकित किया जाना बहुत जरूरी है। आलोचक एवं गोविवि के पूर्व अध्यक्ष अनिल राय ने कहा कि पत्रकार और कवि दोनों भाषाई दुनिया के कार्यकर्ता हैं। पत्रकार सेवानिवृत्त होता है, मगर कवि नहीं। हरीश पाल ने इस सच्चाई को 84 साल की उम्र में समाज को एक साहि​त्यिक कृति देकर साबित किया है। 


उन्होंने कहा कि हरीश पाल ने अपनी कविताओं में जिस सो​शियो पोलेटिकल समाज का चित्र खींचा है, उससे हम वक्त के चेहरे को पहचान सकते हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. अनंत मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि जो दुनिया को खूबसूरत बनाने का सपना नहीं देखता, वह रचनाकार हो ही नहीं सकता। कार्यक्रम के दूसरे चक्र में आयोजित कवि गोष्ठी में प्रो. अनंत मिश्र,. रंजना जायसवाल, प्रो. रघुवंश म​णि, धर्मेंद्र त्रिपाठी, नित्या त्रिपाठी एवं नि​खिल पांडेय ने अपने नई कविताओं का पाठ करके कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। महराजगंज से पधारे संतोष कुमार श्रीवास्तव के अलावा शायर जेपी मल्ल, वसीम मजर्ह, अरुण कुमार श्रीवास्तव, अरविन्द अकेला, नंद कुमार शर्मा नंद, भोजपुरी संगम के संयोजक कुमार अ​भिनीत, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी समेत शहर के तीस से ज्यादा रचनाकार पत्रकार उप​स्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रगतिशील लेखक संघ, गोरखपुर के अध्यक्ष कलीमुल हक ने अति​थियों और श्रोताओं के प्रति अभार व्यक्त किया।

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