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नोयडा के बिसरख में अशुभ होता है रावण दहन, लोग करते हैं पूजा




नोयडा के बिसरख में अशुभ होता है रावण दहन, लोग करते हैं पूजा
Ravana Dahan is considered inauspicious in Bisrakh, Noida, people perform puja.

गौतमबुद्ध नगर, संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। शायद आपको यकीन न हो लेकिन यह सत्य है कि गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर नहीं होता है दहन रावण दहन। ग्रेटर नोएडा में स्थित बिसरख गांव को दशानन रावण की जन्मस्थली माना जाता है। इस गांव में रावण की पूजा होती है। यहां पर दशहरे पर उसके पुतले का दहन नहीं किया जाता है और गांव में रामलीला का मंचन भी नहीं होता है। 


बिसरख गांव में रावण का एक मंदिर भी है। मंदिर के महंत का कहना है कि रावण के पिता ऋषि विश्रसवा द्वारा स्थापित अष्टकोणीय शिवलिंग आज़ भी यहां पर मौजूद है। मान्यता है कि रावण और उसके भाई कुबेर इस शिवलिंग की पूजा करते थे। कहा जाता है कि रावण ने भगवान शिव की तपस्या करते हुए इसी शिवलिंग पर अपने सिर को अर्पित किए था, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें 10 सिर का वरदान दिया था। गांव के लोग बताते हैं कि दूर-दूर से लोग भगवान शिव और बाबा रावण से वरदान मांगने के लिए यहां आते हैं।


ग्रामीणों के अनुसार किसी भी व्यक्ति ने जब पुरानी परंपरा को तोड़कर रामलीला का आयोजन कराया या रावण दहन का काम किया तो उसके साथ अशुभ हुआ। इस वजह से कोई भी रामलीला और रावण दहन नहीं करते हैं। आज समय बदला है, युवाओं के विचार भी बदल रहे हैं, बिसरख गांव के चारों तरफ बड़ी बड़ी गगनचुंबी बिल्डिंगे और  सोसायटिया खड़ी हो गई है लेकिन पुरानी परंपराओं और मान्यताओं के विरुद्ध अब तक कोई भी परिवार या व्यक्ति इस रामायण कालीन परम्परा के खिलाफ नहीं गया है, जिसके चलते यह परंपरा आज भी यहां कायम है। लोगों का कहना है कि आज पुरा हिन्दुस्तान रामलीला का नाट्य मंचन कर रावण के पुतले का दहन कर रहा है तो बिसरख में भगवान शिव के भक्त रावण की पूजा किसी रहस्य और मिथक से कम नहीं है।

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