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एडीजी जोन के नेतृत्व में 3 सदस्यीय एसआईटी कर रही है युवा इंजीनियर के मौत मामले की जांच



एडीजी जोन के नेतृत्व में 3 सदस्यीय एसआईटी
कर रही है युवा इंजीनियर के मौत मामले की जांच

गौतमबुद्ध नगर, संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। उत्तर प्रदेश का गेट वे कहा जाने वाला नोएडा इन दिनों सुर्खियों में है। एक युवा इंजीनियर की मौत के मामले में प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने गम्भीरता दिखाई है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश के साथ ही नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉक्टर लोकेश एम को हटा दिया है।


हालांकि उनके ट्रान्सफर की खबर तभी से ज़ोर पकडने लगी धी जब मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के कैलेंडर में मुख्यमंत्री का फोटो न लगाकर अधिकारियों ने अपनी फोटो छपवाएं थे। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉक्टर लोकेश एम के इस तबादले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। समाचार लिखे जाने तक नोएडा प्राधिकरण में नए सीईओ की तैनाती का समाचार नहीं मिला हैं। फिलहाल लोकेश एम के तबादले को नोएडा सेक्टर 150 में हुई इंजिनर की मौत से जोड़कर देखा जा रहा है। 


नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के तौर पर डॉक्टर लोकेश एम के ईमानदार काम की वैसे चर्चा सदैव होती रही है। इनको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार सम्मानित भी किया है। पता चला है कि जिन बिल्डरों की लापरवाही के कारण बड़े गड्ढे में डूबने से युवराज मेहता की जान गई है वें बिल्डर बहुत बड़े घोटालेबाज है। नोएडा के सेक्टर-150 में रहने वाले इंजीनियर युवराज मेहता का हंसता-खेलता जीवन बर्बाद हो गया। नोएडा से लेकर ग्रेटर नोएडा तक युवराज मेहता की मौत से लोग बेहद नाराज हैं। हर कोई यही कह रहा है कि सरकारी सिस्टम की विफलता के कारण देश ने एक होनहार युवा इंजीनियर युवराज मेहता को खो दिया है।


इन बिल्डरों के ऊपर नोएडा प्राधिकरण के तीन हजार करोड़ रूपए बकाया है। उल्लेखनीय है कि जिस भूखंड पर बने हुए बेसमेंट के गड्डे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की जान गई है वह भूखण्ड एक बड़े घोटाले से जुड़ा हुआ है। नोएडा प्राधिकरण ने यह भूखण्ड खेल सिटी के विकास के लिए थ्री सी नामक बिल्डर को आवंटित किया था। थ्री सी बिल्डर ने इस भूखण्ड के छोटे-छोटे टुकड़े करके लोटस ग्रीन बिल्डर समेत अनेक बिल्डरों को बेच डाला था। थ्री सी बिल्डर को यह जमीन 7 जुलाई 2014 को आवंटित की गई थी। बाद में इस जमीन को लोटस ग्रीन बिल्डर सहित दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था। 


आरोप है कि जिस जमीन का इस्तेमाल खेलों के बुनियादी ढांचे के लिए होना था, उसे बिल्डर कंपनी ने अलग-अलग लोगों को बेच दिया। यह मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का भी संकेत देता है। इसी वजह से अब इस प्रकरण में ईडी और सीबीआई भी जांच कर रही हैं। नागरिकों का आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण अपने पैसे की वसूली नहीं कर पाया और न ही मौके पर सुरक्षा उपकरण लगवा सका। न बैरिकेड्स, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी बोर्ड। अंधेरे और कोहरे में यह इलाका पूरी तरह असुरक्षित था। 


इसी लापरवाही के कारण युवराज की जान चली गई। यह हादसा बताता है कि सिस्टम की उदासीनता कैसे जानलेवा साबित हो सकती है। दूसरी तरफ़ इस घटना के बाद सम्बन्धित जे ई को मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बर्खास्त कर दिया है। जबकि नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक जूनियर इंजीनियर को हटा दिया गया है। उनका कहना है कि कहां और कैसे चूक हुई, यह जांच के बाद ही साफ होगा। 


साथ ही यह भी कहा गया कि बिल्डर का बकाया वसूली से जुड़ा मामला पहले से चल रहा है। इस दौरान नोएडा प्राधिकरण ने अपनी जांच तेज कर दी है। नोएडा प्राधिकरण इस घटना से सबक लेकर भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के तमाम उपायों पर भी काम कर रहा है। इस बीच नागरिकों का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। नागरिकों ने दोषी बिल्डर को सख्त से सख्त सजा देने की मांग तेज कर दी है। उधर पुलिस ने युवराज मेहता के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है। दोषी बिल्डरों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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