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डा. वी.के. वर्मा ने दिया किडनी के उपचार पर शोध पत्र Research paper



डा. वी.के. वर्मा ने दिया किडनी के उपचार पर शोध पत्र
बस्ती, 26 फरवरी। होम्योपैथ के वरिष्ठ चिकित्सक जिला अस्पताल में आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथिक सेमिनार मेंं गुर्दे की बीमारी में होम्योपैथी की उपयोगिता पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्हें अतिथियों द्वारा शोध पत्र के लिये स्मृति चिन्ह, प्रमाण-पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।


शोध पत्र में डा. वी.के. वर्मा ने बताया कि गुर्दे (किडनी) की बीमारियों के लिए होम्योपैथी में बर्बेरिस वल्गारिस (पथरी), कैंथारिस (जलन), और लायकोपोडियम (क्रोनिक समस्याएं) जैसी प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं। ये दवाएं किडनी स्टोन, उच्च क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, और मूत्र संक्रमण  के लक्षणों के अनुसार दी जाती हैं। सही उपचार के लिए विशेषज्ञ (होम्योपैथ) से परामर्श आवश्यक है। किडनी की दीर्घकालिक बीमारी तब विकसित होती है जब कोई बीमारी या स्थिति महीनों या वर्षों तक किडनी के कार्य को बाधित करती है।


इससे किडनी को होने वाली क्षति बिगड़ती जाती है। गुर्दे शरीर के रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थों को निकालते हैं, जो बाद में मूत्र के रूप में उत्सर्जित हो जाते हैं। गंभीर क्रोनिक किडनी रोग शरीर में तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स और अपशिष्ट पदार्थों की खतरनाक रूप से उच्च मात्रा का कारण बन सकता है। सही समय पर उपचार से मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। लगभग 36 वर्षो से होम्योपैथ चिकित्सक के रूप में निरन्तर सक्रिय डा. वी.के. वर्मा ने बताया कि होम्योपैथ में लक्षणानुसार इलाज किया जाता है। मरीज का विश्वास सबसे अधिक महत्व रखता है।

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