
प्रदर्शन मे शामिल शिक्षक कलेक्ट्रेट पर
टीईटी की अनिवार्यता का विरोध जारी,
बस्ती मे प्रदर्शन कर पीएम को भेजा ज्ञापन
बस्ती, 26 फरवरी। परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने की अनिवार्यता के विरोध में हजारों शिक्षकों ने गुरुवार को बीएसए कार्यालय के प्रांगण में धरना देकर पैदल मार्च करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में सभी संगठनो ने एक साथ मिलकर टीईटी पास करने की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग किया।
शिक्षकों का कहना था कि 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार के 2017 के शासनादेश के क्रम में सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है, जबकि सभी शिक्षक नियुक्ति के समय निर्धारित मानकों को पूरा कर ही सेवा में आए थे। सरकार का यह निर्णय न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। धरने को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रिका सिंह ने कहा कि शिक्षकों के ऊपर जबरन टीईटी अनिवार्यता की जा रही है।
शिक्षको ने नियुक्ति के सभी सभी मानक पूर्ण किये थे उस समय सभी परीक्षा पास की थी लेकिन आज सरकार की गलत नीतियों के कारण शिक्षक आज हाशिये पर है। कहा कि शिक्षकों के सम्मान की लड़ाई जिले से लेकर दिल्ली तक लड़ी जाएगी। जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विष्णु दत्त शुक्ल ने कहा कि यह संकट का समय है और इस संकट के समय में हम सभी को एकजुट होकर इस काले कानून के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। धरने और पैदल मार्च में मुख्य रूप से कंचनमाला त्रिपाठी, रीता सिंह, रंजन सिंह, दिनेश सिंह, नीलू द्विवेदी, विनीता त्रिपाठी, मंगला मौर्य, रजनीश यादव, रुकुनुद्दीन, कुसुम कुमारी, गीता सिंह, चंद्र द्विवेदी, चंद्रमोहन, पवन यादव, राम रंग, फौजिया सिद्दीकी, बी पी आनंद, जितेंद्र कुमार, महादेव वर्मा, सुनील सिंह सहित हजारों की संख्या में लोग शामिल रहे।
















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