गंभीर रूप ले सकता है वायरल इन्फेक्शन
Viral infection can take a serious form
मौसम बदल रहा है। दिन मे धूप और सुबह शाम और रात मे गलन हो रही है। ऐसे में सर्दी जुकाम होना स्वाभाविक है। इसको हल्के में न लें, क्योंकि यह संक्रमण श्वसन नली को प्रभावित करता है जो बाद में गंभीर रूप ले सकता है। कहा जाता है, यह एक वायरल इन्फेक्शन होता है जो मुख्य रूप से राइनोवायरस या कोरोनावायरस जैसे वायरस के कारण होता है।
बस्ती जिला चिकित्सालय के आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने बताया कि जुकाम होने पर नाक से पानी बहना, छींक आना, गले में खुजली या दर्द और नाक बंद होना जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में पर्याप्त आराम करें, खूब तरल पदार्थ पिएं, गुनगुने पानी के गरारे करें और भाप लें। ठंडी चीजों, दही, चावल और बासी भोजन से परहेज करें। लक्षण बने रहने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
क्यों होता है वायरल इन्फेक्शन
राइनोवायरस, कोरोनावायरस, मौसम परिवर्तन, अचानक ठंडा या गर्म होने, कमजोर इम्युनिटी यानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने, एलर्जीः धूल, परागकण या प्रदूषण, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरल इन्फेक्शन हो सकता है।
सर्दी जुकाम, वायरल इन्फेक्शन के लक्षण
नाक से लगातार पानी बहना, बार-बार छींक आना, गले में खराश या दर्द, नाक बंद हो जाना, सिर में भारीपन या दर्द, आँखों में जलन या पानी आना, हल्की खांसी या बुखार, शरीर में थकान महसूस होना सर्दी जुकाम के लक्षण हैं।
जुकाम के लिए प्रभावी उपाय
हाइड्रेशनः शरीर में पानी की कमी न होने दें, खूब सारे तरल पदार्थ (गर्म सूप, जूस, नींबू पानी) पिएं। आरामः रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने के लिए 8-10 घंटे की नींद लें और शारीरिक गतिविधि कम करें। गरारे और भापः नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करने से गले की खराश कम होती है, जबकि भाप लेने से बंद नाक खुलती है। परहेजः ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड्रिंक, बासी भोजन, जंकफूड और तली हुई चीजों से बचें। स्वच्छताः हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाएं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
यदि बुखार 101 डिग्री से अधिक हो, सांस लेने में तकलीफ हो, या खांसी 10 दिनों से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, तो तत्काल डॉक्टर से परामर्श लें।
हल्दी वाला दूध
हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है, जो एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीवायरल है। यह गले की खराश शांत करता है और नाक की जकड़न खोलता है। एक गिलास गर्म दूध में 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ी सी काली मिर्च पाउडर मिलाएं। सोने से पहले पिएं। नाक बहना कम होगा और गले को आराम मिलेगा।
तुलसी-अदरक का रस
तुलसी प्राकृतिक रूप से एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टर है। अदरक गर्म प्रकृति का होता है और कफ को पिघलाने, सूजन कम करने में मदद करता है। 5-7 ताजा तुलसी के पत्ते और 1 इंच अदरक का टुकड़ा पीसकर रस निकाल लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटें। बच्चों को भी यह मिश्रण दिया जा सकता है (मात्रा आधी करें)। बंद नाक खुलने में यह बहुत प्रभावी है।
भाप लेना
गर्म भाप नाक के मार्ग को खोलती है, कफ को पतला करती है और साइनस की जकड़न से तुरंत राहत देती है। एक बर्तन में पानी गर्म करें (उबाल आने के बाद आंच बंद कर दें)। इसमें 4-5 बूंद यूकेलिप्टस ऑयल या पुदीने का तेल या सिर्फ अजवाइन डालें। सिर पर तौलिया ढककर इस भाप को 5-10 मिनट तक लें। आँखें बंद रखें। दिन में 2-3 बार करें।
नमक पानी के गरारे
गर्म पानी में नमक गले की सूजन कम करता है, खराश से राहत देता है और गले के हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस को दूर करता है। एक गिलास गर्म पानी में 1 छोटा चम्मच सेंधा नमक या सामान्य नमक घोलें। इस घोल से दिन में 3-4 बार गरारे करें। गले की खराश में यह तुरंत आराम देता है।
गरम पानी के गरारे
एक गिलास गर्म पानी में 1 छोटा चम्मच सेंधा नमक या सामान्य नमक घोलें। इस घोल से दिन में 3-4 बार गरारे करें। गले की खराश में यह तुरंत आराम देता है।
दालचीनी-काली मिर्च
काली मिर्च की चाय दालचीनी शरीर को गर्मी देती है और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। काली मिर्च बंद नाक खोलने और कफ निकालने में मदद करती है। एक कप पानी में 1 छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर (या 1 इंच दालचीनी की छड़ी) और 4-5 काली मिर्च के दाने उबालें। पानी आधा रह जाने पर छान लें। थोड़ा गुड़ या शहद मिलाकर पिएं। यह काढ़ा शरीर को गर्म करेगा और इम्युनिटी बढ़ाएगा।
6. शहद और नींबू
शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। यह गले को कोट करके आराम देता है। नींबू विटामिन सी से भरपूर है जो इम्युनिटी बढ़ाता है और कफ को पतला करता है। एक कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच शहद और आधे नींबू का रस मिलाएं। दिन में 2-3 बार पिएं। खांसी और गले की खराश में विशेष लाभकारी।
7. गर्म सूप
गर्म तरल पदार्थ गले को आराम पहुंचाते हैं, नाक के मार्ग को खोलते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। सब्जियों का सूप पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ताजा घर का बना हल्दी, अदरक, लहसुन, काली मिर्च डाला हुआ गर्म सब्जी या चिकन सूप पिएं। इसमें नींबू का रस निचोड़ सकते हैं। यह शरीर को ताकत देगा और बंद नाक खोलेगा।
8. लहसुन की भुनी
लहसुन में एलिसिन नामक यौगिक होता है जो एक शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टर है। 2-3 लहसुन की कलियों को छिलकर थोड़े से देसी घी में हल्का भून लें। हल्का ठंडा होने पर इन्हें चबा-चबाकर खाएं। दिन में एक बार लें। संक्रमण से लड़ने में मदद मिलेगी।
9. गाय का घी
आयुर्वेद में ‘नस्य’ क्रिया बहुत प्रभावी मानी जाती है। गाय का शुद्ध घी नाक के मार्ग को चिकनाई देता है, सूखापन दूर करता है और वायरस से लड़ने में मदद करता है। गाय के देशी घी को हल्का गुनगुना करें (बस हाथ को सहने लायक गर्म)। ड्रॉपर की मदद से या साफ उंगली से प्रत्येक नथुने में 1-2 बूंद डालें। सुबह खाली पेट करें। नाक बंद होना और बहना दोनों में लाभ होता है।
अजवाइन की भाप या पोटली
अजवाइन में थाइमॉल होता है जो एक प्राकृतिक डिकंजेस्टेंट है। यह बंद नाक खोलने और छाती की जकड़न में बहुत कारगर है। भापः एक कटोरी गर्म पानी में 1 चम्मच अजवाइन डालकर भाप लें।
पोटलीः
सूखी कढ़ाई में 2 चम्मच अजवाइन को गर्म करें अदरक एक प्राकृतिक डिकंजेस्टेंट है जो अतिरिक्त तरल पदार्थ को सुखाकर और गले को आराम देकर फेफड़ों और ब्रांकाई से बलगम को साफ करने में मदद करता है।। इसे एक साफ कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस गर्म पोटली को सूंघें और साइनस के आसपास सिंकाई करें। तुरंत आराम मिलेगा।
हौमयोपैथ में उपचार
डा. वी.के. वर्मा ने कहा होम्योपैथी बेहद सरल, सुलभ और सस्ती चिकित्सा पद्धति है। एकोनाइट, एन्टिमटार्ट, बेलाडोना, ब्रायोनिया, इपिकाक, आर्सेनिक एलबम, सल्फर, नक्सवोम, इप्यूटोरियम पर्फ, एलियमसेपा, कल्केरियम कार्ब, जेल्सिमियम, पल्सेटिला, रसटाक्स आदि दवायें उचित पावर मे चिकित्सक की देखरेख में ली जा सकती हैं जो सर्दी जुकाम की स्थिति में लाभप्रद हो सकती हैं।
इक्सपर्ट परिचय
डा. वी.के. वर्मा, जिला अस्पताल बस्ती में तैनात आयुष विभाग के नोडल अधिकारी हैं। आपने करीब 35 साल के चिकित्सा अनुभवों के आधार पर लाखों रोगियों का सफल इलाज किया है। इन्होने बस्ती से फैजाबाद मार्ग पर पटेल एस.एम.एच. हॉस्पिटल एवं पैरामेडिकल कालेज, बसुआपार में डा. वी.के. वर्मा इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस सहित कई विद्यालयों की स्थापना की है। खास बात ये है कि इनके अस्पताल में दवाओं के अतिरिक्त रोगियों से कोई चार्ज नही लिया जाता। दवाओं के भुगतान में भी डा. वर्मा गरीबों, पत्रकारों, साहित्यकारों की मदद किया करते हैं। इनकी सेवाओं या परामर्श के लिये इस नम्बर पर संपर्क किया जा सकता है। मो.न. 9415163328


















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