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कवियों की रचनाओं पर गूंजे ठहाके, प्रलेस की काव्य गोष्ठी को लोगों ने सराहा



कवियों की रचनाओं पर गूंजे ठहाके,
प्रलेस की काव्य गोष्ठी को लोगों ने सराहा

बस्ती, 18 मार्च। प्रगतिशील लेखक संघ बस्ती इकाई के तत्वावधान में श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका संयोजन प्रलेस बस्ती इकाई के महासचिव डॉ अजीत श्रीवास्तव ’राज़’ ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा तथा मुख्य अतिथि प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो० रघुवंश मणि एवं संचालन दीपक सिंह प्रेमी ने किया।

   

अध्यक्षता कर रहे श्याम प्रकाश शर्मा ने अपनी रचना सुनते हुए कवि की रचनाओं को सीप का मोती बताया और कहा कि वह इस मोती की तरह साफ सुथरे हृदय वाले व्यक्तित्व होते हैं। मुख्य अतिथि ने कहा कि ऐसी गोष्ठियाँ अनवरत होती रहनी चाहिए जिससे तमाम तरह की साहित्यिक विचारधाराए सामने आती है। आज संवेदनाएं और मानवता खत्म होती जा रही है। ऐसे में इसे जीवंत रखने के लिए इस तरह के आयोजनों का होना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।  ‌‌

   

विशिष्ट अतिथि बी एन शुक्ला ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए सभी को धन्यवाद दिया। डॉ० वी के वर्मा ने गढ़ो प्रगति के नित आयाम, कर दो अब से युद्ध विराम सुनाकर समाज को आईना दिखाया। डॉ अजीत श्रीवास्तव ’राज़’ ने तुम न सोचो मुझे देखकर इस तरह, वस्तु क्रय हेतु न हूं मैं बाजार की प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई दिशा दी। अर्चना श्रीवास्तव ने तुम्हारी आंखों के पैमाने से छलका था एक जाम होठों से वो खारा पन अब तक न गया प्रस्तुत किया।


सुशील सिंह पथिक ने करके लहू लुहान बहुत बोलते हैं लोग अब शहर की जुबान बहुत बोलते हैं लोग प्रस्तुत किया। दीपक सिंह प्रेमी ने प्रेम व श्रंगार की रचना प्रस्तुत की। जगदंबा प्रसाद भावुक, सागर गोरखपुरी, डॉ रामकृष्ण लाल जगमग, तौआबा अली, अनवर हुसैन पारसा, हरिकेश प्रजापति, साद अहमद साद, डॉ राजेंद्र सिंह राही, अफजल हुसैन अफजल, आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अजय गोपाल श्रीवास्तव अभिरूप श्रीवास्तव, सामइन फारूखी, रेखा चित्रगुप्त आदित्य राज आशिक संतोष श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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