Type Here to Get Search Results !

Bottom Ad

जिला सहकारी बैंक की वार्षिक आम बैठक मे आत्मनिर्भर भारत की गूंज



जिला सहकारी बैंक की वार्षिक
आम बैठक मे आत्मनिर्भर भारत की गूंज 

बस्ती, 02 मार्च।
शनिवार को जिला सहकारी बैंक की वार्षिक आम बैठक बैंक परिसर मे सम्पन्न हुई। बैठक मे सहकारिता की शक्ति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा और भारत के भविष्य की आर्थिक संरचना पर गंभीर चिंतन हुआ। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सहकारिता पदाधिकारियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत को वैश्विक शक्ति और आर्थिक महाशक्ति बनाने का सबसे सशक्त माध्यम सहकारिता ही है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता का वास्तविक आधार गांव, किसान और स्थानीय उत्पादन व्यवस्था है, और इन तीनों को जोड़ने वाला सबसे प्रभावी तंत्र सहकारिता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल बैंकिंग या कृषि तक सीमित व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और सामूहिक विकास की भारतीय परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां सरकारी योजनाएं कभी-कभी प्रशासनिक जटिलताओं में उलझ जाती हैं, वहीं सहकारिता सीधे समाज के बीच जाकर विकास को गति देती है।


उन्होंने विवेक क्षेत्र के सफल सहकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सहकारिता मॉडल को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बन सकती है। उनके अनुसार आने वाले समय में सहकारी संस्थाएं रोजगार सृजन, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्योगों की रीढ़ बनने वाली हैं। बैठक में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित गौसेवा उपाध्यक्ष महेश शुक्ला ने सहकारिता सेवा आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि सहकारिता व्यवस्था समाज के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक अवसर पहुंचाने का माध्यम बन रही है। 


उन्होंने कहा कि यदि इसी मॉडल को अन्य क्षेत्रोंकृकृषि, दुग्ध, मत्स्य, लघु उद्योग और विपणनकृमें लागू किया जाए तो ग्रामीण भारत आर्थिक क्रांति का केंद्र बन सकता है। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र विधायक संजय जायसवाल तथा विधायक दयाराम चौधरी ने सहकारिता को ग्रामीण विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सहकारी बैंकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सहकारी संस्थाओं को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।


पूर्व विक्रम सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन भारतीय संस्कृति के ‘साझा श्रम और साझा लाभ’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था। जिला सहकारी बैंक बस्ती के अध्यक्ष राजेंद्र नाथकतिवारी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सहकारिता की दार्शनिक और आर्थिक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए कहा, “सहकारिता आज के प्रगतिशील युग की महाभारत है कृ जो सहकारिता में नहीं है, वह किसी भी अर्थशास्त्र की पुस्तक में नहीं मिलेगा।” 


उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा आधारित अर्थव्यवस्था में जहां व्यक्ति अकेला पड़ जाता है, वहीं सहकारिता सामूहिक शक्ति के माध्यम से संतुलित विकास का मार्ग प्रदान करती है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की पारंपरिक ग्राम व्यवस्था मूलतः सहकारी ही थी, जिसे आधुनिक संस्थागत रूप देकर नई ऊर्जा देने की आवश्यकता है। सहकारिता केवल आर्थिक मॉडल नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास, पारदर्शिता और साझा उत्तरदायित्व का दर्शन है। बैठक में सहकारिता के जिला संयोजक राम शंकर यादव, पूर्व संचालक बाबूराम सिंह, प्रेम सागर तिवारी, भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा, संचालक हमीरपाल, अमित सिंह, शत्रुघ्न पाल, सुशील ने कहा कि सहकारी संस्थाओं को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर उत्पादन, विपणन और उद्यमिता से जोड़ना समय की मांग है।


बैंक के सचिव राहुल रोज सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बैंक की वित्तीय प्रगति, ऋण वितरण, किसानों को दी गई सुविधाओं तथा आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर रत्नेश पाल, अमित प्रमोद, रवि सिंह, अमरनाथ सिंह, रविंद्र गौतम, रामदास पांडे सहित अनेक सहकारी सदस्यों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सहकारिता को गांव-गांव तक मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया। बैठक का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि सहकारिता केवल आर्थिक संस्था नहीं बल्कि भारत के भविष्य की विकास दृष्टि है। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज स्वयं विकास का भागीदार बनता है, तभी राष्ट्र वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर और शक्तिशाली बनता है। 

Post a Comment

0 Comments

Below Post Ad

GAUTAM BUDDH

 

SHARMA

 

BD GLOBAL
CMPM

 

SP AUTO
KRISHNA
PATEL S.M.H.
ST. JOSEPH
DRMS

Bottom Ad