बस्ती के के.डी. अस्पताल मे प्रसूता की मौत, स्वजनों ने काटा हंगामा
बस्ती, 19 मई। जनपद के निजी अस्पताल मौत बांट रहे हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। घटना के बाद जब पीड़ित परिवार सड़क पर उतरता है, विरोध प्रदर्शन करता तक स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हो जाती है। अस्पताल को सील कर औपचारिकता पूरी कर ली जाता है। पीड़ित परिवार अस्पताल संचालक से पैसा लेकर स्वजनों की लाश का सौदा कर लेता है या फिर अस्पताल के संचालक स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को खुश करके पुनः पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं।
बगैर घटना घटे स्वास्थ्स विभाग की टीम कभी जांच पड़ताल करने नही निकलती। नतीजा ये है कि जनपद मे अवैध अस्पतालों का एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है। ताजा मामला जिगिना स्थित केडी अस्पताल का है। आरोप है कि इलाज मे लापरवाही के चलते एक 25 वर्षीय प्रसूता को अपनी जांन गंवानी पड़ी। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मुंडेरवा थाना क्षेत्र के जगदीशपुर मंझरिया निवासी बृजेश चौधरी की 25 वर्षीय पत्नी अल्का वर्मा को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को बस्ती शहर स्थित केडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। रविवार दोपहर डॉक्टरों ने ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया, जिसमें अल्का ने एक बच्ची को जन्म दिया। सोमवार शाम करीब छह बजे अल्का की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उसे तत्काल कृष्णा मिशन अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन एंबुलेंस से अल्का को कृष्णा मिशन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मंगलवार को पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले अस्पताल पर आयुष्मान योजना के तहत फर्जी आपरेशन का आरोप लगा था जिसमे एसपी डा. यशवीर सिंह ने जांच रिपोर्ट तलब किया है। बड़ा सवाल ये है कि आये दिन हो रही ऐसी घटनाओं से प्रशासन कब सबक लेगा और ऐसे अस्पतालों पर कब नकेल कसी जायेगी। अभी मुण्डेरवां के अमृत हास्पिटल मे खुजली से परेशान युवती के इलाज पर लापरवाही का आरोप लगा था, युवती की जान चली गयी थी, प्रशासन ने हमेशा की तरह अस्पताल सील कर अपने जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली। लेकिन क्या परिजनों ने जिन्हे खोया है वे वापस आ जायेंगे ?











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