लोक अदालत में निस्तारित वादों की
ऊपरी अदालत में अपील नहीं होती- अतुल श्रीवास्तव
गौतमबुद्ध नगर संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने बुधवार को जनपद न्यायालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान गुरुवार को कहा कि सुलह समझौते के आधार पर लोक अदालत में निस्तारित वादों की ऊपरी अदालत में अपील नहीं होती है। उन्होंने आगामी 09 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी।
जनपद न्यायाधीश ने बताया कि जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित एवं सरल निस्तारण किया जाएगा। इनमें मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिनियम से संबंधित वाद, वैवाहिक वाद, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के मामले, दीवानी वाद, एमवी एक्ट एवं ई-चालान वाद, आर्बिट्रेशन मामले, लघु शमनीय अपराध, धारा 138 एनआई एक्ट के वाद, विद्युत अधिनियम के मामले, भू-राजस्व, सेवा एवं पेंशन संबंधी प्रकरण, श्रम विवाद तथा अन्य प्रकृति के मामले शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त प्री-लिटीगेशन स्तर पर बैंक ऋण, विद्युत बिल एवं बीएसएनएल बिल से संबंधित मामलों का भी सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण कराया जाएगां जनपद न्यायाधीश ने यह भी बताया कि “समाधान समारोह“ अभियान के अन्तर्गत माननीय उच्चतम न्यायालय में लम्बित ऐसे वाद जिनका सौहार्द पूर्ण समाधान सम्भव है, का सुलह समझौते के माध्यम से निस्तारण हेतु दिनांक 21, 22 व 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ऐसे वादकारी जिनके वाद माननीय उच्चतम न्यायालय में लम्बित है व जिनमें सुलह समझौते की संभावना है, वे अपने वादों का निस्तारण “समाधान अभियान“ के अन्तर्गत 21, 22 व 23 अगस्त 2026 को आयोजित विशेष लोक अदालत में करा सकते है। इस अवसर पर अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत सोमप्रभा मिश्रा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवानी रावत सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।












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